हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व होता है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को कुशाग्रहणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण , पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। इस बार भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि दो दिन है। इसी के साथ हरतालिका तीज व्रत और गणेश चतुर्थी दोनों ही एक दिन पड़ती है। इसमें भगवान शिव और गणेश जी की पूजा दोनों ही एक दिन होती है। हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा होती है।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष अमावस्या
10 सितंबर
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह की चतुर्दशी तिथि सुबह 10 बजकर 34 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। इस दिन को कुशाग्रहणी अमावस्या होने के कारण कुशा तोड़ी जाती है। इसे पिठोरी अमावस्या भी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अमावस्या पर धार्मिक अनुष्ठान करने वाले पंडित कुशा तोड़ते जिसका इस्तेमाल पूरे वर्ष करते हैं।
11 सितंबर
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि सुबह 08 बजकर 57 मिनट तक रहेगी। जिसमें स्नान और दान के लिए यह तिथि सबसे अच्छी रहेगी। इस दिन पितरों के लिए दान आदि करने का विशेष महत्व होता है। अमावस्या पर पितरों को तर्पण करने के लिए बहुत ही खास मानी जाती है।
12 सितंबर
इस दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत सुबह 07 बजकर 47 मिनट तक है, जिसमें श्रीगुरु ग्रंथ साहिब प्रथम प्रकाश दिवस मनाया जाएगा।
13 सितंबर वराह जयंती
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल द्वितीया तिथि सुबह 07 बजकर 09 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद तृतीया तिथि लग जाएगी। इस तिथि पर श्री वराह जयंती मनाई जाएगी।
14 सितंबर
14 सितंबर को भाद्रपद माह की तृतीया तिथि पर हरितालिका तीज का व्रत रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि सुबह 07 बजकर 07 मिनट तक रहेगी फिर इसके बाद चतुर्थी तिथि जाएगी। इस दिन चतुर्थी तिथि भी लगेगी जिसमें गणेशात्सव का पर्व मनाया जाएगा। इस कलंकी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन चांद के दर्शन करना वर्जित होता है।
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