Janmashtmi 2022: भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कहानी तो सभी जानते हैं, कि किस तरह उनके जन्म लेते ही कारागार के दरवाजे अपने आप खुल गए और वासुदेव जेल से शिशु कृष्ण को लेकर नंद के घर चले गए। लेकिन बहुत कम ही लोग हैं, जिन्हें श्रीकृष्ण के देह त्याग के बारे में पता होगा। श्रीहरि ने स्वयं देवकी के उदर से 8वें बेटे के रूप में पूर्णावतार लिया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीहरि ने कब, कहां और कैसे देह को त्याग दिया था? आज हम आपके इसके बारे में बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं।
श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। लेकिन उनका बचपन वृंदावन, गोकुल, बरसाना, नंदगांव, द्वारिका आदि जगहों पर बीता। बताया जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद श्रीकृष्ण ने द्वारका पर 36 वर्षों तक राज किया था, भगवान श्रीकृष्ण अपनी आठ पत्नियों के साथ द्वारका में रहते थे। श्रीकृष्ण की 8 पत्नियां- सत्यभामा, रुक्मणी, जाम्बवंती, मित्रबिंदा, कालिंदी, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा थीं।
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कृष्ण के बाद उनकी पत्नीयों का क्या हुआ?
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श्रीकृष्ण को छोड़कर मारे गए सभी कृष्णवंशी
महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद जब श्रीकृष्ण गांधारी को सांत्वना देने के लिए महल पहुंचे, तो गांधारी ने क्रोध में आकर भगवान श्रीकृष्ण को शाप दे दिया, कि जिस तरह से मेरे वंश का नाश हुआ है, उसी प्रकार तुम्हारा वंश भी आपस में लड़कर खत्म हो जाएगा। शाप के मुताबिक ही, एक दिन सभी कृष्णवंशी एक यदु पर्व पर सोमनाथ के पास प्रभास क्षेत्र में इकट्ठा हुए, जहां सभी मदिरा पान करके आपस में लड़ने लगे और ऐसे में श्रीकृष्ण को छोड़कर सभी मारे गए।
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Krishna Janmashtami 2022
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वहीं श्रीकृष्ण के देह त्याग के बारे में बात करें तो, जरा नामक एक शिकारी ने मृग समझकर श्रीकृष्ण पर विषयुक्त बाण चला दिया, ये बाण उनके पैर के तलवे में जा लगा। इसी का बहाना लेकर भगवान श्रीकृष्ण ने देह त्याग दिया।
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कृष्ण के बाद उनकी पत्नीयों का क्या हुआ?
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भगवान श्रीकृष्ण के देह त्याग के बाद जब अर्जुन श्रीकृष्ण की पत्नियों और अपने मामा वासुदेव से मिलने गए, तो वसुदेव यदुओं की आपसी लड़ाई का सारा किस्सा सुनाते हैं। इसके बाद अर्जुन श्रीकृष्ण की आठों पत्नियों और द्वारका वासियों को लेकर वहां से निकल पड़े।
कृष्ण के बाद उनकी पत्नीयों का क्या हुआ?
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वह भयानक जंगलों को पार करते हुए पंचनद देश में पड़ाव डालते हैं, जहां लुटेरे उनपर धावा बोल देते हैं। अर्जुन जैसे-तैसे यदुवंश की बची हुई महिलाओं और बच्चों को लेकर इंद्रप्रस्थ पहुंचते हैं। इसके बाद अर्जुन इंद्रप्रस्थ का राजा श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्र को बना देते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की आठ पत्नियों में से रुक्मणी और जाम्बवंती अग्नि में प्रवेश कर जाती हैं। वहीं सत्यभामा तथा अन्य देवियां तपस्या करने वन में चली जाती हैं।