Akshaya Tritiya 2019
नीम की कोपल और सत्तू का लगाएं भोग
अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर समुद्र, गंगा या किसी भी पवित्र नदी अथवा घर में ही स्नान करने के बाद भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की शांत चित्त होकर पूजा करने का विधान है। इस दिन लक्ष्मीनारायण की पूजा सफ़ेद, पीले रंग के कमल या गुलाब के पुष्प से करनी चाहिए। नैवेद्य में गेहूं, जौ, चने का सत्तू, मिश्री, नीम की कोपल, ककड़ी और चने की भीगी दाल अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए।यह तिथि वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के प्रारम्भ का दिन भी है, इसलिए अक्षय तृतीया के दिन जल से भरे घड़े, कुल्हड़,सकोरे, पंखे, पादुका, चटाई, छाता, चावल, नमक, घी, ख़रबूज़ा, ककड़ी, मिश्री, सत्तू आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान महा पुण्यकारी माना गया है।
लक्ष्मीनारायण के साथ-साथ ही सुख-सौभाग्य-समृद्धि हेतु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का पूजन भी किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन दान देने वाला प्राणी सूर्यलोक को जाता है। जो इस तिथि को उपवास करता है, वह रिद्धि-वृद्धि और श्री से संपन्न हो जाता है।