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Mahashivratri 2019 : कितना भी ताकवर शत्रु हो, विजय जरूर दिलाती हैं ये शिव साधनाएं

Sun, 03 Mar 2019 11:59 AM IST
Madhukar Mishra मधुकर मिश्र, अमर उजाला, दिल्ली
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Mahashivratri 2019
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महाशिवरात्रि पर की जाने वाली तमाम साधनाओं में आज आप हम आपको बताएंगे वह विशेष साधना जिसके करने से बड़े से बड़े शत्रु पर विजय पाई जा सकती है। इस ब्रह्मांड में तीन सबसे बड़े अस्त्र माने गए हैं। जिनमें पहला पशुपतास्त्र, दूसरा नारायणास्त्र एवं तीसरा ब्रह्मास्त्र है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव के पास त्रिशूल के अलावा चार शूलों वाला परम शक्तिशाली दिव्य अस्त्र है, जिसे पशुपतास्त्र कहते हैं। 

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Mahashivratri 2019
शिव ने अर्जुन को दिया था यह पशुपतास्त्र 
महाभारत के युद्ध में विजय की कामना करते हुए अर्जुन ने भगवान शिव की कठिन तपस्या करके इस पशुपतास्त्र को प्राप्त किया था। भगवान शिव ने इसे अर्जुन को देते हुए कहा था कि इसे तुम्हें चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसे पास रखने मात्र से ही तुम्हारी विजय हो जाएगी और यदि तुमने इसे गलती से चला दिया तो संसार में प्रलय आ जा जाएगा। 

Mahashivratri 2019
चारों दिशा से विजय दिलाने वाली साधना
आज के समय शिव के इस दिव्य अस्त्र को प्राप्त करना तो कठिन कार्य है लेकिन कोई भी साधक महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करके शत्रुओं पर विजय पा सकता है। शिव के इस चमत्कारी शूलास्त्र यानी पशुपतास्त्र की साधना सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इस साधना को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर या सोमवार के दिन किसी योग्य गुरु के सान्निध्य में विधि-विधान से ही करें। यदि इस साधना को कर पाने में असमर्थ हों तो महाशिवरात्रि के दिन पाशुपतास्त्र स्तोत्र का पाठ करें। भगवान शिव को समर्पित यह पाठ चारों दिशा से विजय दिलाता है।

Mahashivratri 2019
महाकालेश्वर साधना
सनातन परंपरा में भगवान शिव की साधना को कल्याणकारी माना गया है। शिव के तमाम स्वरूपों में महाकाल की साधना सभी प्रकार की सिद्धि और मृत्यु के भय को दूर करने वाली है। भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना करने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है और शत्रुओं का नाश होता है। महाकाल की साधना महाशिवरात्रि के दिन या सोमवार के दिन उत्तर दिशा की ओर मुख करके करके पूजन करते हुए किसी योग्य पंडित के माध्यम से संपूर्ण करें। महाकाल की साधना मृत्यु शय्या पर पड़े व्यक्ति को भी जीवन प्रदान कर सभी संकटों से बचाने वाली है। 
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Mahashivratri 2019
रामेश्वरम् साधना
भगवान शिव की इस दिव्य साधना को भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व किया था। इस महासाधना के पश्चात् प्रभु श्रीराम ने अपने शत्रु रावण का अंत कर विजय प्राप्त की थी। इस साधना को महाशिवरात्रि या किसी सोमवार को प्रदोषकाल में करें। कहने का तात्पर्य इसे संध्याकाल में यानी सूर्यास्त से पूर्व और सूर्यास्त के बाद अर्थात् दिन रात्रि के संधिकाल में दक्षिण की ओर मुख करके पीले आसन पर की जानी चाहिए। इस साधना को विधि-विधान से करने पर शत्रु पर विजय अवश्य प्राप्त होती है।

भगवान शिव को समर्पित पावन रात्रि अर्थात् महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा करवाने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-
https://www.amarujala.com/services/pujas  
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