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Karwa Chauth Vrat Katha: करवा चौथ का पर्व आज, जानें क्या है व्रत की संपूर्ण कथा

Fri, 10 Oct 2025 12:06 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Karwa Mata Ki Kahani in Hindi: करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है। इस वर्ष 10 अक्तूबर 2025 को करवा चौथ का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन करवा माता की कथा का पाठ करने का विधान है। ऐसे में आइए इस संपूर्ण व्रत कथा को जानते हैं।
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Karwa Chauth 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रखा जाता है। इस वर्ष 10 अक्तूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सभी सुहागिनें पति की लंबी उम्र, सुखी जीवन, रिश्तों में प्रेम और अच्छी सेहत के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। साथ ही अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए भगवान गणेश, देवी पार्वती और चंद्रमा की पूजा करती हैं। व्रत का प्रारंभ हमेशा सरगी सेवन से होता है और पराण चंद्रमा निकलने के बाद किया जाता है। इस अवधि में महिलाएं करवा माता की कथा का पाठ करती हैं, जिसे बेहद कल्याणकारी माना जाता है। कहते हैं कि करवा चौथ पर 'करवा चौथ व्रत कथा' का पाठ करने से पति-पत्नी के रिश्तों में मजबूती आती है और वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है। ऐसे में आइए व्रत की संपूर्ण कथा के बारे में जानते हैं।

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करवा चौथ की व्रत कथा
एक नगर में 1 साहूकार की बेटी रहती थी, जिसका नाम करवा था। उसके 7 भाई भी थे, जो उसे बेहद प्रेम किया करते थे। एक दिन की बात है जब करवा अपने ससुराल से मायके आई थी। यह दिन कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि थी और इस दिन उसका व्रत था। वह बहुत परेशान थी और उसकी परेशानी को देखते हुए उसके सभी भाई कारण पूछने लगे।

भाईयों के पूछने पर करवा ने कहा कि आज उसका निर्जला उपवास है और इसका पारण तब तक नहीं होगा जब तक की चंद्रमा को अर्घ्य न दे दिया जाए। करवा चांद न निकलने के कारण परेशान थी और भूख-प्यास की वजह से वह व्याकुल थी। करवा की इस हालत को देखते हुए उसके सभी भाई परेशान हो गए और वह उसकी चिंता करने लगे। इस दौरान करवा के सबसे छोटे भाई को एक विचार आया और वह घर के बाहर पीपल के पेड़ पर छलनी में एक दीपक रख देता है। उसके ऐसा करने पर दूर से देखने पर ऐसा लगता है कि मानों चंद्रोदय हो रहा है। ऐसी करने के बाद भाई जाकर अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल गया है।

अपने भाई की बात सुनकर करवा प्रसन्न होती है और छलनी के दीपक को चांद समझकर अर्घ्य देती है। इसके बाद करवा अपने व्रत का पारण करने के लिए भी बैठ जाती है। इस दौरान वह जैसे ही भोजन का पहला निवाला अपने मुंह में डालती है, तो उसे छींक आने लगती है। इसके बाद जैसे ही वह दूसरा निवाला मुंह में रखने के लिए अपने हाथ उठाती हैं तभी उसमें बाल आ जाता है। फिर वह जब तीसरी बार खाने के लिए निवाला लेती हैं तो उसे एक अशुभ समाचार मिलता है कि उसके पति का देहांत हो गया। इस दुख भरी खबर को सुनते ही करवा के होश उड़ जाते हैं और वह रोने-चिल्लाने लगती है। इस दृश्य को देख उसकी भाभी आती हैं और वह करवा को बताती है कि व्रत के पारण के लिए उसके छोटे भाई ने क्या किया था।

भाभी की बातों को सुनकर करवा के होश उड़ जाते हैं और वह हैरान हो जाती है। यह सभी बातों को सुनकर वह प्रण लेती हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए वह अपने पति को जीवित कराएगी। वहीं करवा के पति के शव को सुरक्षित रखा जाता है और वह शव के पास साल भर रहती है। पति के शव के पास सूई जैसी घासें उगती हैं, उसे वह एकत्र कर लेती है। फिर जब अगली बार व्रत रखती है, तो उसकी सभी भाभी व्रत रखती हैं। जब वह पूजा करती है तो करवा की सभी भाभियां करवा का आशीर्वाद लेती हैं। इस दौरान करवा भी उनसे कहती है कि यम की सूई ले लो, पिय की सुई दे दो और मुझे भी सुहागन बना दो। करवा की इस बात को सुनकर सभी भाभियां ऐसा करने से इंकार कर देती है और कहती है कि यह सब कुछ छोटे भाई की वजह से ऐसा हुआ है तो तुम उसकी पत्नी से जाकर यह कहो।

भाभी की बात सुनकर वह अपने छोटे भाई की पत्नी को जाकर कहती है और वह भी उसकी बातों को नहीं मानती हैं। करवा के बार-बार कहने पर भी उसकी भाभी उसकी यह बात नहीं मानती हैं और अतं में करवा उसे जोर से पकड़ लेती है और भाभी को उसकी यह बात माननी पड़ती है। इसके बाद छोटी भाभी अपने हाथ की सबसे छोटी अंगुली काटकर अमृत निकालती है। फिर वह करवा के मृत पति के मुख में उसे डालती है, जिसके प्रभाव से वह जीवित हो जाता है। इस दौरान जैसी ही वह जिंदा होता है, तो वह भगवान गणेश के मंत्रों का उच्चारण करता  है।

माना जाता है कि करवा का पति गणेश जी और मां गौरी की कृपा से जीवित होता है। तभी से ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर जो भी महिलाएं उपवास करती हैं उन्हें गणेश जी और मां गौरी की पूजा करनी चाहिए। इसके प्रभाव से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन खुशहाल बनता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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