शुक्रवार 10 अक्तूबर को सुहागिनों को महापर्व करवा चौथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व होता है। इस व्रत में सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की मनोकामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सुबह से बिना कुछ खाए पीये व्रत रखती हैं और शाम को करवा चौथ की पूजा और कथा सुनने के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं। करवा चौथ का व्रत प्रमुख रूप से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब , हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। करवा चौथ व्रत में सुगागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करते हुए छलनी से चांद को देखती है फिर पति के हाथों के जल ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं। आइए जानते हैं। करवा चौथ की तिथि, पूजा मुहूर्त और इस दिन चंद्रोदय का समय समेत प्रमुख जानकारियां।
करवा चौथ 2025 शुभ योग
इस वर्ष करवा चौथ व्रत पर कई तरह के शुभ योगों का निर्माण हुआ है। पंचांग के अनुसार करवा चौथ पर सिद्धि योग बनेगा। इसके अलावा इस दिन चंद्रमा शुक्र की राशि वृषभ में मौजूद होंगे। सिद्धि योग का निर्माण 10 अक्तूबर को सुबह से लेकर शाम 05 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। वहीं इसके अलावा शिववास योग का भी संयोग बनेगा।
करवा चौथ शुभ तिथि 2025
चतुर्थी तिथि का आरंभ- 09 अक्तूबर को देर रात 10 बजकर 54 मिनट
चतुर्थी तिथि का समापन- 10 अक्तूबर शाम 07:38 मिनट
पूजन शुभ मुहूर्त- 10 अक्तूबर 2025
शाम 05:57 मिनट से शाम 07:11 मिनट तक
पूजन अवधि- 1 घंटा 14 मिनट
करवा चौथ व्रत समय- सुबह 06:19 मिनट से शाम 08: 13 मिनट तक
करवा चौथ व्रत अवधि- 13 घंटे 54 मिनट
करवा चौथ 2025
चंद्रोदय का समय- 10 अक्तूबर
शाम 08 बजकर 13 मिनट
(अलग-अलग शहरों में समय में थोड़ा बदलाव)
करवा चौथ 2025 चंद्रोदय का समय (Chauth Moon Rise Time In India 10 October)
10 अक्तूबर 2025 की शाम को पंचांग गणना के अनुसार रात 08 बजकर 13 मिनट पर चंद्रोदय होगा। लेकिन अलग-अलग शहरों में चांद के निकलने के समय में अंतर आ सकता है।
करवा चौथ पूजन विधि 2025
- सबसे पहले करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद सास के द्वारा दी गई सरगी को ग्रहण करें।
- फिर करवा चौथ पर निर्जला व्रत जारी रखें।
- करवा चौथ की शाम को चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं, इसमें भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर दें।
- फिर लोटे में जल भरकर उसके ऊपर श्रीफल रखकर कलावा बांध दें।
- दूसरा मिट्टी का टोंटीदार कुल्लड़ (करवा) लेकर उसमें जल भरकर व ढक्कन में मिठाई और दक्षिणा रखें, रोली से करवे पर स्वास्तिक बनाएं।
- धूप, दीप, अक्षत और फूल चढ़ाकर भगवान का पूजन करें।
- चौथमाता की कथा का श्रवण या वाचन करें।
- चंद्रोदय होने पर दर्शन, पूजन और चंद्रदेव को अर्ध्य देकर बड़ों का आशीर्वाद लें।