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Krishna Janmashtami 2022: 64 दिनों में सीखी श्रीकृष्ण ने 64 कलाएं, जानिए क्या थी वो कलाएं

Thu, 18 Aug 2022 08:19 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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श्री कृष्ण 64 कलाएं - फोटो : अमर उजाला
Krishna Janmashtami 2022:  श्री कृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को मनाई जाएगी। भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्तों को जन्माष्टमी के एक दिन पहले एक ही भोजन करना चाहिए। उपवास के दिन, भक्त एक दिन के उपवास का पालन करने के लिए संकल्प लेते हैं और अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि समाप्त होने पर इसे तोड़ते हैं। कृष्ण पूजा करने का समय निशिता काल है जो वैदिक काल के अनुसार मध्यरात्रि है। धर्म शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण 64 कलाओं में निपुण थे वो चाहे गीत संगीत से जुड़ी हो या नृत्य से। भगवान श्री कृष्ण ने इन 64 कलाओं का ज्ञान मात्र 64 दिन में ही लिया था। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर हम आपको श्री कृष्ण द्वारा सीखी गई 64 कलाओं की जानकारी देंगे। आइए जानते हैं श्री कृष्ण ने 64 कलाओं का ज्ञान कहां और किससे प्राप्त किया। 
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श्री कृष्ण 64 कलाएं
श्री कृष्ण ने यहां से लिया था 64 कलाओं का ज्ञान 
धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को 64 कलाओं का ज्ञान था। भगवान श्री कृष्ण ने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा और ज्ञान उज्जैन के संदीपनि आश्रम में ही गुरू संदीपनि से प्राप्त किया था। श्री कृष्ण के साथ उज्जैन विद्या प्राप्त करने मित्र सुदामा व भाई बलराम भी आए थे। ऐसा माना जाता है कि विश्व का सबसे पहला गुरुकुल यही था। श्रीकृष्ण जब उज्जैन में गुरु सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने गए तो मात्र 64 दिनों में ही 64 कलाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया। 
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श्री कृष्ण 64 कलाएं
क्या हैं वो 64 कलाएं 
श्रीमदभागवतपुराण के दशम स्कन्द के 45 वें अध्याय के अनुसार श्री कृष्ण निम्न 64 कलाओं में पारंगत थे-
1- नृत्य – नाचना
2- वाद्य- तरह-तरह के बाजे बजाना
3- गायन विद्या – गायकी।
4- नाट्य – तरह-तरह के हाव-भाव व अभिनय
5- इंद्रजाल- जादूगरी
6- नाटक आख्यायिका आदि की रचना करना
7- सुगंधित चीजें- इत्र, तेल आदि बनाना
8- फूलों के आभूषणों से श्रृंगार करना
9- बेताल आदि को वश में रखने की विद्या
10- बच्चों के खेल
11- विजय प्राप्त कराने वाली विद्या
12- मन्त्रविद्या
13- शकुन-अपशकुन जानना, प्रश्नों उत्तर में शुभाशुभ     बतलाना
14- रत्नों को अलग-अलग प्रकार के आकारों में काटना
15- कई प्रकार के मातृका यन्त्र बनाना
16- सांकेतिक भाषा बनाना

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श्री कृष्ण 64 कलाएं - फोटो : अमर उजाला
17- जल को बांधना।
18- बेल-बूटे बनाना
19- चावल और फूलों से पूजा के उपहार की रचना   करना। (देव पूजन या अन्य शुभ मौकों पर कई रंगों से   रंगे चावल, जौ आदि चीजों और फूलों को तरह-तरह से   सजाना)
20- फूलों की सेज बनाना।
21- तोता-मैना आदि की बोलियां बोलना – इस कला के जरिए तोता-मैना की तरह बोलना या उनको बोल सिखाए जाते हैं।
22- वृक्षों की चिकित्सा
23- भेड़, मुर्गा, बटेर आदि को लड़ाने की रीति
24- उच्चाटन की विधि
25- घर आदि बनाने की कारीगरी
26- गलीचे, दरी आदि बनाना
27- बढ़ई की कारीगरी
28- पट्टी, बेंत, बाण आदि बनाना यानी आसन, कुर्सी, पलंग आदि को बेंत आदि चीजों से बनाना।
29- तरह-तरह खाने की चीजें बनाना यानी कई तरह सब्जी, रस, मीठे पकवान, कड़ी आदि बनाने की कला।
30- हाथ की फूर्ती के काम
31- चाहे जैसा वेष धारण कर लेना
32- तरह-तरह पीने के पदार्थ बनाना
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श्री कृष्ण 64 कलाएं - फोटो : Istock
33- द्यू्त क्रीड़ा
34- समस्त छन्दों का ज्ञान
35- वस्त्रों को छिपाने या बदलने की विद्या
36- दूर के मनुष्य या वस्तुओं का आकर्षण
37- कपड़े और गहने बनाना
38- हार-माला आदि बनाना
39- विचित्र सिद्धियां दिखलाना यानी ऐसे मंत्रों का प्रयोग
40-कान और चोटी के फूलों के गहने बनाना – स्त्रियों की चोटी पर सजाने के लिए गहनों का रूप देकर फूलों को गूंथना।
41- कठपुतली बनाना, नाचना
42- प्रतिमा आदि बनाना
43- पहेलियां बूझना
44- सूई का काम यानी कपड़ों की सिलाई, रफू,   कसीदाकारी करना।
45 – बालों की सफाई का कौशल
46- मुट्ठी की चीज या मनकी बात बता देना
47- कई देशों की भाषा का ज्ञान
48 – मलेच्छ-काव्यों का समझ लेना – ऐसे संकेतों को लिखने व समझने की कला जो उसे जानने वाला ही समझ सके।
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श्री कृष्ण 64 कलाएं
49 – सोने, चांदी आदि धातु तथा हीरे-पन्ने आदि रत्नों की परीक्षा
50 – सोना-चांदी आदि बना लेना
51 – मणियों के रंग को पहचानना
52- खानों की पहचान
53- चित्रकारी
54- दांत, वस्त्र और अंगों को रंगना
55- शय्या-रचना
56- मणियों की फर्श बनाना यानी घर के फर्श के कुछ हिस्से में मोती, रत्नों से जड़ना।
57- कूटनीति#शास्त्र_संस्कृति_प्रवाह||
58- ग्रंथों को पढ़ाने की चातुराई
59- नई-नई बातें निकालना
60- समस्यापूर्ति करना
61- समस्त कोशों का ज्ञान
62- मन में कटक रचना करना यानी किसी श्लोक आदि   में छूटे पद या चरण को मन से पूरा करना।
63-छल से काम निकालना
64- शंख, हाथीदांत सहित कई तरह के कान के गहने तैयार करना।
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