shri krishna
दरअसल, राजा मुचकुंद ने असुरों से युद्ध कर देवताओं को विजय दिलाई थी। लगातार कई दिनों तक युद्ध की वजह से बहुत थक गए थे। इसलिए देवराज इंद्र ने उनसे सोने का आग्रह किया और वरदान दिया कि जो कोई भी आपको निद्रा से जगाएगा वो जलकर भस्म हो जाएगा। श्रीकृष्ण ने लीला स्वरुप उसी गुफा में प्रवेश किया था। जहां मुचकुंद सोए थे। भगवान का पीछा करते हुए जब कालयवन उस गुफा में पहुंचा तो श्री कृष्ण ने उसे भ्रमित करने के लिए अपना पीतांबर राजा मुचकुंद के ऊपर डाल दिया। अंधेरी गुफा में कालयवन को लगा कि श्री कृष्ण गुफा में छिपकर सो रहे हैं। इसलिए उसने राजा मुचकुंद को श्रीकृष्ण समझकर जगा दिया। राजा मुचकुंद के जगते ही कालयवन भस्म हो गया। भगवान श्रीकृष्ण ने पूरे जीवनकाल में तमात लीलाएं की और लोगों का उद्धार किया। यह लीला भी इसी में से एक है जिसके बाद उनका नाम रणछोड़ पड़ा।
महाभारत में अर्जुन को श्रीमद्भागवत का उपदेश देते समय भगवान श्रीकृ्ष्ण ने कहा है कि संसार में जो कुछ भी घटित होता है उसमे मेरी ही इच्छा शामिल होती है।