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Janki Jayanti 2022 : जानकी जयंती आज, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Thu, 24 Feb 2022 01:00 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Janki Jayanti 2022 : जानकी जयंती को सीता अष्टमी के नाम से जाना जाता है। जानकी जयंती पर भगवान राम और माता सीता की उपासना-पूजा करने से सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं।
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janki jayanti 2022: सनातन धर्म में माता सीता को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में जानकी जयंती का विशेष महत्व होता है।   - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Janki Jayanti 2022: आज फाल्गुन माह की अष्टमी तिथि है और इस तिथि पर हर वर्ष जानकी जयंती के रूप में मनाई जाती है। जानकी जयंती को सीता अष्टमी के नाम से जाना जाता है। जानकी जयंती पर भगवान राम और माता सीता की उपासना-पूजा करने से सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि कोराजा जनक की पुत्री माता सीता का प्राकट्य हुआ था। माता सीता अपने त्याग एवं समर्पण के लिए पूजनीय हैं। इस पावन उत्सव पर माता सीता की पूजा की जाती है एवं व्रत उपवास रखा जाता है। आइए जानते हैं जानकी जयंती की तिथि मुहूर्त और व्रत विधि-
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जानकी जयंती शुभ मुहूर्त 2022
अष्टमी तिथि यानी जानकी जयंती की तिथि 23 फरवरी को शाम 04 बजकर 56 मिनट से शुरू हो चुकी है जिसका समापन 24 फरवरी 2022 को 03 बजकर 03 मिनट पर होगा। ऐसे में सीता अष्टमी का पर्व उदयातिथि पर ही मनाई जाएगी और इसमें पूजा-आराधना करना चाहिए।

जानकी जयंती का महत्व
सनातन धर्म में माता सीता को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में जानकी जयंती का विशेष महत्व होता है।  इस तिथि पर उपवास रखते हुए पूजा-उपासना करके माता सीता की कृपा प्राप्ति कर सकते हैं। जानकी जयंती पर मंदिरों में भगवान श्री राम और माता सीता की पूजा के लिए भक्तों का तांता लग जाता है। इस दिन जो भी व्यक्ति भगवान श्री राम और माता सीता की पूजा करता है उसे सोलह महादान का फल और पृथ्वी दान का फल प्राप्त होता है। जानकी जंयती का व्रत सौभाग्यशाली स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। 
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जानकी जयंती व्रत विधि
सुबह स्नान करने के घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
दीप प्रज्वलित करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
मंदिर में देवताओं को स्नान करवाएं। 
अगर घर में गंगा जल है तो, देवताओं को स्नान वाले जल में गंगा जल मिलाएं।
भगवान राम और माता सीता का ध्यान करें। 
शाम को माता सीता की आरती के साथ व्रत खोलें।
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