first bhog in jagannath temple
- फोटो : Adobe Stock
भगवान जगन्नाथ की लकड़ी की मूर्ति
भगवान जगन्नाथ की मूर्ति लकड़ी से बनाई जाती है, जो अन्य देवी-देवताओं की पत्थर या धातु की मूर्तियों से अलग है। इन्हें "नीलमाधव" के नाम से भी जाना जाता है। भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियां भी विराजमान हैं। इन मूर्तियों को हर 12 साल बाद एक विशेष परंपरा के तहत बदला जाता है, जिसे "नवकलेवर" या "नवकलश" उत्सव कहा जाता है। इस प्रक्रिया में नई मूर्तियां पुराने नियमों और विधियों के अनुसार तैयार की जाती हैं।
first bhog in jagannath temple
- फोटो : adobe stock
भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद
पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में जो भोग अर्पित किया जाता है, उसे "महाप्रसाद" कहा जाता है। यह प्रसाद भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को चढ़ाने के बाद भक्तों में बांटा जाता है। महाप्रसाद को बेहद पवित्र माना जाता है और इसे खाने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
महाप्रसाद न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इसे ग्रहण करने से शरीर में ऊर्जा बढ़ती है, मन शांत होता है और नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं। श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में नहीं, बल्कि ईश्वर का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं।
first bhog in jagannath temple
- फोटो : adobe stock
भगवान जगन्नाथ मंदिर की अनोखी भोग परंपरा
भगवान जगन्नाथ का भोग सबसे पहले माता पार्वती के रूप में मानी जाने वाली विमला देवी को अर्पित करने की परंपरा कई धार्मिक और पौराणिक कारणों से जुड़ी है। विमला देवी का मंदिर जगन्नाथ मंदिर के परिसर के अंदर ही स्थित है और उन्हें भगवान जगन्नाथ की बहन माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, विमला देवी भगवान जगन्नाथ की अत्यंत भक्त थीं और सदैव उनकी सेवा में लगी रहीं। उनकी इस अटूट भक्ति और प्रेम को सम्मान देते हुए, यह परंपरा चली आ रही है कि भगवान के भोग का पहला भाग विमला देवी को अर्पित किया जाए। ऐसा माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ की पूजा और भोग तभी पूर्ण होता है जब पहले यह प्रसाद विमला देवी को दिया जाता है। इसलिए उनकी पूजा भगवान जगन्नाथ की पूजा के समान महत्वपूर्ण मानी जाती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।