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Hanuman Jayanti 2021: स्वाति नक्षत्र और सिद्धियोग में हनुमान पूजन करना और भी अधिक फलदायक

Mon, 26 Apr 2021 12:19 PM IST
विनोद शुक्ला पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य

सार

  • हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा, मंगलवार 27 अप्रैल को है। इसी दिन भगवान शंकर के ग्यारहवें रूद्र ने वानरराज केसरी और माता अंजना के घर पुत्र रूप में जन्म लिया। हनुमान जयंती का यह त्योहार समूचे भारतवर्ष में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाता है।
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हनुमान जी एक ऐसे देवता हैं जो कलयुग में भी पृथ्वी पर विराजमान हैं।
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विस्तार
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हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा, मंगलवार 27 अप्रैल को है। इसी दिन भगवान शंकर के ग्यारहवें रूद्र ने वानरराज केसरी और माता अंजना के घर पुत्र रूप में जन्म लिया। हनुमान जयंती का यह त्योहार समूचे भारतवर्ष में श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाता है। भक्ति अवतार के रूप में भगवान शिव के ग्यारहवें रूद्र हनुमान के जन्मोत्सव पर पूजा का अमोघ फल होता है कोई भी प्राणी श्रद्धा और विश्वास से बजरंगबली की पूजा करता है तो उसे किसी भी प्रकार के आरिष्ट का भय नहीं रहता। आंजनेय उसे सब प्रकार से सुख, समृद्धि और एश्वर्य प्रदान करते हैं। इस दिन हनुमानजी की पूजा में चोला चढ़ाने के साथ-साथ तेल और सिंदूर चढ़ाने का भी विधान है। जयंती के उत्सव स्वरुप कई जगह श्रद्धालुओं द्वारा झांकियां निकाली जाती है, जिसमें उनके जीवन चरित्र का नाटकीय प्रारूप प्रस्तुत किया जाता है। बहुत से भक्त उन्हें छप्पन प्रकार का भोग भी लगाते हैं। 

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हनुमान ने सभी नौ ग्रहों को राक्षस राज रावण से मुक्त कराया था अतः सभी ग्रहों का वरदान है कि जो भी प्राणी हनुमानजी का भक्ति पूर्वक पूजन आदि करेगा उसे किसी भी प्रकार की ग्रह शान्ति करने की आवश्यकता नहीं। ऐसे प्राणी को मारकेश अथवा मरणतुल्य कष्ट देने वाले ग्रहों का दोष भी नहीं सताएगा। इस दिन बजरंग बाण और हनुमान बाहुक का पाठ करने से जन्म कुंडली के अकाल मृत्यु योग भी नष्ट हो जाएंगे। इनकी आराधना के फलस्वरूप सभी अशुभ ग्रह शुभ फल देने को विवश हो जाते हैं।

इस वर्ष 27 अप्रैल, मंगलवार को स्वाति नक्षत्र और सिद्धियोग होने से पूजन करना और भी अधिक फलदायक हो गया है। हनुमानजी में तेज, धृति, यश, चतुरता, शक्ति, विनय, नीति, पुरुषार्थ, उत्तम बुद्धि, शूरता, दक्षता, बल, धैर्य और पराक्रम हमेशा विद्यमान रहते हैं। इनके स्मरण से मनुष्य में बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, आरोग्यता, विवेक और वाक्पटुता आदि गुण तत्क्षण आ जाते हैं। प्रसन्न होने पर ये माता सीता
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द्वारा वरदान रूप में प्राप्त आठों सिद्धियां और नौ निधियां, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व इन अष्ट सिद्धियों में से कुछ भी दे सकते हैं। माता सीता की कृपा से प्राप्त नौ निधियां भी प्रसन्न होने पर भक्ति अवतार हनुमानजी तत्काल दे देते हैं। ये नौ निधियां भी नौ देवियों की कृपा शक्ति ही हैं जिनके नाम इस प्रकार हैं।
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'पद्मनिधि" से परिवार में सुख-समृद्धि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को प्राप्त होती रहती है।
'महापद्म निधि' से खुशहाली सात पीढ़ियों तक बनी रहती है।
'नीलनिधि' सफल उद्योगपति और कारोबार बनाती है।
'मुकुंदनिधि' सभी प्रकार की विलिसिता और भौतिक सुखों को देती है।
'नन्दनिधि' से अल्पायु योग नष्ट होता है और लम्बी उम्र और कामयाबी मिलती है।
'मकरनिधि' से निधि से प्राणी हर प्रकार की शस्त्र विद्या और युद्धकला में दक्ष हो जाता है।
'कच्छपनिधि' के प्रभाव से दौलत और संपत्ति बनी रहती है।
'शंखनिधि' से व्यक्ति कुबेर के सामान धनवान हो जाता है।
'खर्वनिधि' व्यक्ति को विरोधियों और कठिन समय पर विजय पाने की ताकत और दक्षता देती है। अतः कलयुग में हनुमान की आराधना सभी कष्टों से मुक्ति दिलाती है।

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