फेस्टिवल ऑफ लाइट्स के नाम से मशहूर यहूदियों का त्योहार 22 दिसंबर से शुरू हो गया है। मान्यता है कि यहूदी लोगों के मदिंर के तेल का एक जार मंदिर के शाश्वत दीपक को पूरे आठ दिनों तक जलाए रखता था। आज भी हनुकाह में तेल से बनी चीजों का प्रयोग अधिक किया जाता है। इस त्योहर में लगातार 8 दिनों तक मोमबत्ती जलाई जाती है। आज हम आपको इस त्योहार से जुडी खास बातें बताने जा रहे हैं।
कब मनाया जाता है हनुकाह
- हिब्रू कैलेंडर के हिसाब से हनुकाह साल के नौवें महीने यानी सितंबर से शुरू हो जाता है। वहीं, ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से हनुकाह दिसंबर के आखिरी हफ्ते में मनाया जाता है और 8 दिनों तक यह पर्व मनाया जाता है। इस साल हनुकाह 22 दिसंबर से शुरू हो गया है और 30 दिसंबर तक मनाया जाएगा।
हनुकाह मनाने की विधि
- हनुकाह आठ दिनों तक मनाए जानें वाला पर्व है। हर दिन एक मोमबत्ती 9 शाखा वाली कैंडल ब्रूम में लगाकर जलाई जाती हैं। घर को तरह तरह की लाइट्स से सजाया जाता है। तेल से बने पकवान खाए जाते हैं और हनुकाह के दिन ड्रेडल नाम का खेल भी खेला जाता है।
क्यों खास है हनुकाह?
- जिस तरह हिंदू धर्म में दिवाली के समय लाइट्स और रोशनी की जाती है। ठीक वैसे ही इस त्योहार में भी रोशनी और लाइट्स का बहुत अधिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि शुभ चीजों की शुरुआत रोशनी से ही होती है। रोशनी खुशी को दर्शाती है। इस त्योहार को और खास बनाता है दिसंबर महीने का यह आखिरी हफ्ता, जब क्रिसमस और नए साल का जश्न मनाया जाता है।