हलषष्ठी व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल छठ का व्रत रखा जाता है। इस बार षष्ठी तिथि 24 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से शुरू हो जाएगी और जो 25 अगस्त को सुबह 10 बजकर 11 मिनट तक रहेगी फिर उसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। हलषष्ठी व्रत की पूजा दोपहर के समय किया जाता है। इस तरह से कुछ लोग हलषष्ठी व्रत 24 तो कुछ 25 अगस्त को मना रहे हैं।
व्रत का महत्व
हल षष्ठी व्रत का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे रखने से व्रती महिलाओं के संतान की सुरक्षा और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से संतान को रोग, भय और अनिष्ट से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, यह व्रत घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
व्रत की विधि
इस दिन व्रती महिलाएं प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद वे घर के आंगन में गोबर से लीप कर एक चौक बनाती हैं और उस पर हल और भगवान बलराम का प्रतीक बनाकर पूजा करती हैं। पूजा में विशेष रूप से हल से जुड़ी वस्तुएं जैसे कि हल्दी, चावल, और विभिन्न प्रकार के अनाज का प्रयोग किया जाता है। इस दिन हल का उपयोग करने की मनाही होती है, इसलिए व्रती महिलाएं इस दिन बिना हल के निकले हुए अनाज और फलों का ही सेवन करती हैं।
व्रत की कथा
हल षष्ठी व्रत की कथा के अनुसार, एक बार भगवान श्रीकृष्ण के भाई बलराम जी के जन्म से पहले माता रोहिणी ने यह व्रत रखा था। इस व्रत के प्रभाव से ही बलराम जी को अत्यधिक बलशाली और दीर्घायु होने का वरदान मिला।
एक अन्य कथा के अनुसार एक ग्वालिन दूध दही बेचकर अपना जीवन व्यतीत करती थी। एक बार वह गर्भवती दूध बेचने जा रही थी तभी रास्ते में उसे प्रसव पीड़ा होने लगी। इस पर वह एक झरबेरी पेड़ के नीचे बैठ गई और वहीं पर एक पुत्र को जन्म दिया।
ग्वालिन को दूध खराब होने की चिंता थी इसलिए वह अपने पुत्र को पेड़ के नीचे सुलाकर पास के गांव में दूध बेचने के लिए चली गई। उस दिन हलछठ का व्रत था और सभी को भैंस का दूध चाहिए था लेकिन ग्वालिन ने लोभवश गाय के दूध को भैंस का बताकर सबको दूध बेच दिया। इससे छठ माता को क्रोध आया और उन्होंने उसके बेटे के प्राण हर लिए। ग्वालिन जब लटकर आई तो रोने लगी और अपनी गलती का अहसास किया। इसके बाद सभी के सामने उसने अपना गुनाह स्वीकार कर पैर पकड़कर माफी मांगी। इसके बाद हर छठ माता प्रसन्न हो गई और उसके पुत्र को जीवित कर दिया। इस वजह से ही इस दिन पुत्र की लंबी उम्र की कामना से हलछठ का व्रत व पूजन किया जाता है।