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Gupt Navratri 2022: इस दिन पड़ेगी साल 2022 में पहली नवरात्रि, जानें इस पर्व का धार्मिक महत्व एवं पूजा विधि

Sun, 16 Jan 2022 08:36 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली

सार

Gupt Navratri 2022:साल 2022 में पहली माघ गुप्त नवरात्रि माघ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा यानि 02 फरवरी 2022 से शुरू को पड़ने जा रही है। आइए जानते हैं इसका धार्मिक महत्व एवं पूजन विधि के बारे में- 
 
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Gupt Navratri 2022
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विस्तार
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Gupt Navratri 2022: माता दुर्गा की साधना का पर्व नवरात्रि साल में दो नहीं बल्कि चार बार आता है. हिंदी महीनों के अनुसार प्रथम चैत्र मास में पहली वासंतिक नवरात्रि, चौथे मास यानि कि आषाढ़ मास में दूसरी नवरात्रि, आश्विन मास में तीसरी यानि शारदीय नवरात्रि और ग्यारहवें मास यानि माघ मास में चौथी नवरात्रि आती है। इसमें से माघ मास में पड़ने वाली नवरात्रि को “माघ गुप्त नवरात्रि”  और आषाढ़ मास में पड़ने वाली नवरात्रि को “आषाढ़ गुप्त नवरात्रि” कहते हैं। साल 2022 में पहली माघ गुप्त नवरात्रि माघ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा यानि 02 फरवरी 2022 से शुरू को पड़ने जा रही है। आइए जानते हैं इसका धार्मिक महत्व एवं पूजन विधि के बारे में- 

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Gupt Navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला
गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व 
नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है लेकिन गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्य की साधना-आराधना की जाती है। यह महाविद्या हैं मां काली, मां तारा देवी, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी। गुप्त नवरात्रि में शक्ति की साधना को अत्यंत ही गोपनीय रूप से किया जाता है, इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि की पूजा को जितनी ही गोपनीयता के साथ की जाती है, उतना ही मां दुर्गा अपनी कृपा बरसाती है।

Gupt Navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला।
गुप्त नवरात्रि घट स्थापना  
गुप्त नवरात्रि में भी देवी पूजा के प्रथम दिन कलश की स्थापना की जाती है और पूरे नौ दिनों तक सुबह-शाम देवी की पूजा-पाठ, करते हैं। 
घटस्थापना मुहूर्त : 02 फरवरी 2022, बुधवार,  प्रात: 07:09 से 08:31 तक 
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Gupt Navratri 2022
गुप्त नवरात्रि पूजा विधि 
  • गुप्त नवरात्रि के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर साधक को स्नान-ध्यान करना चाहिए। 
  • देवी दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को एक लाल रंग के कपड़े में रखकर लाल रंग के वस्त्र या फिर चुनरी आदि चढ़ाएं। 
  • इसके साथ एक मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं। इसमें प्रतिदिन उचित मात्रा में जल का छिड़काव करते रहे हैं।  
  • इसके साथ मंगल कलश में गंगाजल, सिक्का आदि डालकर उसे शुभ मुहूर्त में आम्रपल्लव और श्रीफल रखकर स्थापित करें।  
  • फिर फल-फूल आदि को अर्पित करते हुए देवी की विधि-विधान से प्रतिदिन पूजा करें।  
  • इसके बाद अष्टमी या नवमी के दिन देवी की पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें।  
  • उन्हें पूड़ी, चना, हलवा आदि का प्रसाद खिलाकर कुछ दक्षिण देकर विदा करें।  
  •  पूजा की समाप्ति के बाद कलश को किसी पवित्र स्थान पर विसर्जन करें। 
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