फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Eid Ul-Adha 2025: जून में कब मनाई जाएगी बकरीद? जानिए तारीख और त्योहार से जुड़ी खास बातें

Thu, 22 May 2025 04:52 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Eid Ul Adaha: ईद उल-अजहा, जिसे बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का त्योहार है जो हज के समापन और कुर्बानी की परंपरा से जुड़ा है। वर्ष 2025 में यह त्योहार 7 या 8 जून को मनाया जा सकता है, अंतिम तारीख चांद दिखने पर तय होगी।
विज्ञापन
बकरीद 2025 - फोटो : adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

When is eid al-Adha: ईद उल-अजहा, जिसे आम बोलचाल में बकरीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हर साल ईद-उल-फितर के बाद मनाया जाता है। इस्लामिक पंचांग के अनुसार यह पर्व जुल हिज्जा माह की 10वीं तारीख को आता है, जो हिजरी कैलेंडर का आखिरी महीना होता है। यह महीना हज यात्रा के लिए भी प्रसिद्ध है, और इसीलिए बकरीद को हज के समापन पर विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन मुसलमान हज़रत इब्राहीम की उस निष्ठा और बलिदान को याद करते हैं, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने पुत्र की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था।

विज्ञापन

Numerology: दिल के बड़े साफ होते हैं इस मूलांक के लोग, करियर में बनाते हैं अलग पहचान
यह त्योहार कुरबानी, सेवा और त्याग की भावना से जुड़ा होता है। ईद-उल-फितर के लगभग 70 दिन बाद आने वाला यह पर्व मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत अहम होता है। बकरीद पर जानवर की कुर्बानी दी जाती है और उसका मांस तीन भागों में बांटा जाता है, एक हिस्सा गरीबों को, दूसरा रिश्तेदारों को और तीसरा खुद के लिए रखा जाता है। इस बार 2025 में ईद उल-अजहा जून महीने में मनाई जाएगी, जिसकी सही तारीख चांद दिखाई देने के अनुसार तय होगी। अनुमान है कि यह पर्व 7 या 8 जून को मनाया जा सकता है।
विज्ञापन

Mangal Gochar: 7 जून को मंगल का सिंह राशि में गोचर, जानें मेष और वृश्चिक वालों पर इसका प्रभाव

बकरीद 2025 - फोटो : adobe stock
बकरीद 2025 में कब है?
बकरीद जिसे ईद उल-अजहा भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो चांद दिखाई देने पर तय होता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व जुल हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। साल 2025 में बकरा ईद संभावित रूप से 6 या 7 जून को मनाई जा सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि चांद के दीदार के बाद ही होगी। इसलिए, सही तारीख जानने के लिए चांद दिखने का इंतजार जरूरी होता है।

बकरीद 2025 - फोटो : adobe stock
कुर्बानी का महत्व
ईद उल-अजहा को ‘कुर्बानी का दिन’ भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन जानवर की कुर्बानी देना विशेष रूप से पुण्य और सम्मान की बात मानी जाती है। इस्लामिक शिक्षाओं के अनुसार, बकरा या अन्य हलाल जानवर की कुर्बानी करना वाजिब माना गया है, जिसका दर्जा फर्ज के बाद आता है। कुर्बानी के जरिए अल्लाह के प्रति अपनी भक्ति, समर्पण और आज्ञापालन की भावना प्रकट की जाती है।
विज्ञापन

बकरीद 2025
क्यों मनाई जाती है बकरीद ?
इस त्योहार के पीछे एक ऐतिहासिक और धार्मिक कथा जुड़ी है। हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने आदेश दिया कि वे अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करें। उन्होंने बिना हिचकिचाहट अपने बेटे हज़रत इस्माइल को कुर्बान करने का इरादा किया। उनकी सच्ची नीयत और भक्ति को देखकर अल्लाह ने यह बलिदान रोक दिया और इस्माइल की जगह एक बकरे की कुर्बानी करने का आदेश दिया। तभी से इस दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है और इस परंपरा का पालन दुनियाभर के मुसलमान आस्था और श्रद्धा के साथ करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें