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Bakrid 2025: कुर्बानी और इबादत का पवित्र पर्व बकरीद आज, जानिए कैसे मनायी जाती है

Sat, 07 Jun 2025 07:31 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Eid al-Adha 2025: बकरीद 2025 हमें हज़रत इब्राहीम की आस्था, त्याग और अल्लाह के प्रति समर्पण की याद दिलाती है। यह पर्व न केवल इबादत का दिन है, बल्कि सेवा, सहयोग और इंसानियत का भी उत्सव है। 
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बकरीद हमें पैगंबर हज़रत इब्राहिम की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Significance of Bakrid: आज, 7 जून 2025, को दुनियाभर में ईद-उल-अजहा, जिसे आम भाषा में बकरीद कहा जाता है,मनाई जा रही है। यह इस्लाम धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। बकरीद का मूल भाव त्याग, समर्पण और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। यह दिन हमें पैगंबर हज़रत इब्राहिम की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जब उन्होंने ईश्वर की आज्ञा का पालन करते हुए अपने पुत्र इस्माईल को कुर्बान करने का संकल्प लिया था।

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Bakrid 2025: बकरीद आज, जानें ईद-उल-अजहा का महत्व और इतिहास
इस त्योहार का संदेश केवल धार्मिक नहीं बल्कि मानवीय भी है, जो इंसानियत, सेवा, दान और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है। बकरीद के माध्यम से हम सीखते हैं कि सच्चा विश्वास और समर्पण तभी सार्थक होता है जब उसमें त्याग और दूसरों के लिए सोच हो। इस प्रकार, बकरीद न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह समाज में प्रेम, एकता और सहिष्णुता फैलाने का भी एक शक्तिशाली माध्यम है।

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बकरीद का धार्मिक महत्व - फोटो : Adobe Stock
त्योहार का धार्मिक महत्व
हज़रत इब्राहीम को जब अल्लाह ने उनके सबसे प्रिय बेटे की कुर्बानी देने की आज़माइश में डाला, तो उन्होंने बिना झिझक इसे स्वीकार किया। जब वे अपने बेटे को कुर्बान करने लगे, तब अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक मेढ़ा भेज दिया और उनकी आस्था को स्वीकार किया। तभी से इस घटना की याद में बकरीद पर कुर्बानी दी जाती है, जिसे 'सुन्नत-ए-इब्राहीमी' कहा जाता है।

बकरीद के दिन की शुरुआत विशेष ईद की नमाज़ से होती है।
नमाज़ और इबादत
बकरीद के दिन की शुरुआत विशेष ईद की नमाज़ से होती है। यह नमाज़ मस्जिदों, ईदगाहों या खुले मैदानों में सामूहिक रूप से अदा की जाती है। नमाज़ से पहले इमाम खुतबा (प्रवचन) देते हैं जिसमें कुर्बानी का महत्व और सामाजिक सेवा का संदेश दिया जाता है। नमाज़ के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर "ईद मुबारक" कहते हैं और भाईचारे की भावना को साझा करते हैं।

बकरीद 2025 - फोटो : adobe stock
कुर्बानी की परंपरा
नमाज़ के बाद कुर्बानी दी जाती है। इसमें बकरा, भेड़, ऊंट या बैल की कुर्बानी दी जाती है, जो शरीयत के अनुसार स्वस्थ और उम्र में पूरी शर्तें पूरी करता हो। कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है:
  • एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को
  • दूसरा रिश्तेदारों और पड़ोसियों को
  • और तीसरा खुद के परिवार के लिए रखा जाता है। यह परंपरा समाज में समानता, सहयोग और करुणा का संदेश देती है।

बकरीद का त्योहार स्वादिष्ट पकवानों के बिना अधूरा है - फोटो : Adobe stock
दावत और पकवान
बकरीद का त्योहार स्वादिष्ट पकवानों के बिना अधूरा है। घरों में बिरयानी, क़ोरमा, कबाब, शीरखुरमा और सेवइयां जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे के घर जाकर दावतों में शामिल होते हैं और त्योहार की खुशियां साझा करते हैं।
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बकरीद - फोटो : Adobe Stock
एकता और भाईचारे का प्रतीक
बकरीद केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इंसानियत, सेवा और त्याग का प्रतीक है। इस दिन मुसलमान जरूरतमंदों की मदद करते हैं, दान देते हैं और समाज में शांति, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। यह पर्व याद दिलाता है कि सच्चा धर्म वही है जो दूसरों की भलाई में लगे। बकरीद  हमें हज़रत इब्राहीम की आस्था, त्याग और अल्लाह के प्रति समर्पण की याद दिलाती है। यह पर्व न केवल इबादत का दिन है, बल्कि सेवा, सहयोग और इंसानियत का भी उत्सव है। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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