फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Diwali 2024: दीपावली महामुहूर्त पर महालक्ष्मी से पाएं वरदान, लक्ष्मी-गणेश की संपूर्ण पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

सार

कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 31 अक्तूबर 2024 को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से शुरू हो रही है और 01 नवंबर को शाम 6 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम माना गया है। 
विज्ञापन
Happy Diwali 2024 Wishes - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विज्ञापन

धनं धान्यं पशुं बहुपुत्रलाभं शतसंवत्सरं दीर्घमायुः।।
श्रीवर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाविधात् क्षोभमानं महीयते।
ऋणरोगादिदारिद्र्यपापक्षुदपमृत्यवः। भयशोकमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा।।
आनन्दः कर्दमः श्रीदश्चिक्लीत इति विश्रुताः। ऋषयः श्रियः पुत्राश्च श्रीर्देवीर्देवता मताः।।
महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।।
लक्ष्मीं प्रियसखीं भूमिं नमाम्यच्युतवल्लभाम्।।
विष्णुपत्नीं क्षमां देवीं माधवीं माधवप्रियाम्।
स्रोत: ऋग्वेद

महामुहूर्त पर महालक्ष्मी से वरदान


संकेत : प्रस्तुत मंत्र ऋग्वेद से लिया गया है, जिनमें श्रीमहालक्ष्मी का उनके अनेक नामों द्वारा पूजन-स्तवन किया गया है। वैदिक द्रष्टा ऋषियों ने उनकी महिमा का वर्णन करते हुए कहा है कि इन मंत्रों द्वारा मां का अर्चन करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्ति होती है और घर-परिवार में हर प्रकार की सुख-समृद्धि बनी रहती है।

मंत्रार्थ : दीपावली जैसे महामुहूर्त पर मां श्रीमहालक्ष्मी की असीम कृपा पाने के लिए उनकी पूजा-आराधना ‘ऋग्वेद’ के इन मंत्रों द्वारा इस प्रकार करें कि हे भगवान! विष्णु की पत्नी मां श्रीमहामहालक्ष्मी! हे क्षमास्वरूपिणी! माधवी, माधवप्रिया, प्रियसखी, अच्युतवल्लभा, भूदेवी भगवती लक्ष्मी] मैं आपको नमस्कार करता हूं।
विज्ञापन


हम विष्णु पत्नी श्रीमहालक्ष्मी को जानते हैं तथा उनका ध्यान करते हैं। वे लक्ष्मी जी सन्मार्ग पर चलने के लिए हमें प्रेरणा प्रदान करें। पूर्व कल्प में जो आनंद, कर्दम, श्रीद और चिक्लीत नामक विख्यात चार ऋषि हुए थे, उसी नाम से दूसरे कल्प में भी वे ही सब लक्ष्मी के पुत्र हुए।

बाद में उन्हीं पुत्रों से महालक्ष्मी अतिप्रकाशमान शरीर वाली हुईं। उन्हीं महालक्ष्मी से देवता भी अनुगृहीत हुए। ऋण, रोग, दरिद्रता, पाप, क्षुधा, अपमृत्यु, भय, शोक तथा मानसिक ताप आदि ये सभी मेरी बाधाएं सदा के लिए नष्ट हो जाएं। भगवती महालक्ष्मी! आप हमें ओज, आयुष्य, आरोग्य, धन, धान्य, पशु, अनेक पुत्रों की प्राप्ति तथा सौ वर्ष के दीर्घ जीवन का विधान करें और मानव इनसे मुंडित होकर प्रतिष्ठा प्राप्त करें।

तात्पर्य: ऋग्वेद के इन मंत्रों द्वारा मां श्रीमहालक्ष्मी की आराधना करने से संसार के सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति तो होती ही है, साथ में संपूर्ण परिवार को दुख-दरिद्रता से भी मुक्ति मिल जाती है। ये मंत्र अमोघफलदायी हैं। आज दीपावली जैसे महामुहूर्त पर इन मंत्रों द्वारा मां की पूजा-आराधना करके लाभ उठाया जा सकता है।

आज दीपोत्सव का महापर्व शुभ दीपावली है। दिवाली पर महालक्ष्मी की पूजन करने का विधान है। हर वर्ष कार्तिक अमावस्या पर प्रदोष काल और निशिता काल में पूजा-आराधना और मंत्रोचार करते हुए मां लक्ष्मी का आवहन किया जाता है। दिवाली पर महालक्ष्मी की पूजा से जुड़ी कई नियम हैं जिसका पालन जरूर करना चाहिए।

आज दीपावली पर शाम के समय सुख, समृद्धि और धन की वर्षा कराने वाले चार राजयोग बनेंगे। ये हैं शश, कुलदीपक, शंख और लक्ष्मी योग। इन योगों के होने से लक्ष्मी पूजा सफल और शुभ फल में वृद्धि होगी। पंचांग भेद के कारण कुछ जगहों पर दिवाली आज 31 अक्तूबर को मनाई जा रही है तो कुछ जगहों पर 01 नवंबर को भी। कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 31 अक्तूबर को रात्रि में रहेगी इस कारण से देशभर के अधिकांश ज्योतिषी 31 अक्तूबर को दिवाली मनाने की सलाह दे रहे हैं। दिवाली की रात्रि महालक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का विधान होता है। 

सालभर की सभी अमावस्याओं में कार्तिक अमावस्या श्रेष्ठतम मानी गई है क्योंकि इस दिन महालक्ष्मी की पूजा-आराधना करके अपने इष्ट कार्य को तो सिद्ध किया ही जा सकता है, शक्ति आराधना और काली पूजा के लिए भी यह अमावस्या सर्वोपरि मानी गई है। दिवाली का दिन लक्ष्मी के स्वागत और पूजा-आराधना का दिन है, हम चारों ओर प्रकाश फैलाकर सकारात्मकता के साथ महालक्ष्मी से समृद्धि और सम्पन्नता मांगते हैं। इसमें अंधेरे को दूर कर प्रकाश किया जाता है, इसी तरह हमें अपने अन्दर के विकारों के अन्धकार को मिटाकर अनुशासन,प्रेम, सत्य और सदाचार रुपी प्रकाश से स्वयं को प्रकाशित करना चाहिए।

दिवाली शुभ मुहूर्त
कार्तिक माह की अमावस्या तिथि 31 अक्तूबर 2024 को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट से शुरू हो रही है और 01 नवंबर को शाम 6 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम माना गया है। प्रदोष काल का समय शाम 05 बजकर 48 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।

लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त - 31 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 33 मिनट से 08 बजकर 51 मिनट तक।
निशिता काल मुहूर्त - 31 अक्तूबर की रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 01 नवंबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक।
प्रदोष काल - शाम 05 बजकर 48 मिनट से 08 बजकर 21 मिनट तक।
वृषभ काल - शाम 06 बजकर 35 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट तक।

दिवाली लक्ष्मी पूजा के 10 आसान चरण
1- इस दिन प्रदोष वेला से लेकर पिशाच वेला के आरंभ से पहले तक ही महालक्ष्मी पूजा का विधान है। यह पिशाच वेला रात्रि 02 बजे से आरंभ होती है।
2- पूजा के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और इस लाल कपड़े के ऊपर अक्षत की एक परत बिछा दें।
3-  श्री लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा को विराजमान करें और यथाशक्ति पूजन सामग्री लेकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
4- उत्तर दिशा को वास्तु में धन की दिशा माना गया है,इसलिए दीपावली पर यह क्षेत्र यक्ष साधना,लक्ष्मी पूजन और गणेश पूजन के लिए आदर्श स्थान है।
5- जल कलश व अन्य पूजन सामग्री जैसे- खील पताशा, सिन्दूर, गंगाजल,अक्षत-रोली,मोली, फल-मिठाई, पान-सुपारी, इलाइची आदि उत्तर और उत्तर-पूर्व में ही रखा जाना शुभ फलों में वृद्धि करेगा। इसी प्रकार गणेशजी के पूजन में दूर्वा, गेंदा और गुलाब के फूलों का प्रयोग शुभ माना गया है।
6- पूजा स्थल के दक्षिण-पूर्व की तरफ घी का दीप जलाते हुए ॐ दीपोज्योतिः परब्रह्म दीपोज्योतिः जनार्दनः ! दीपो हरतु में पापं पूजा दीपं नमोस्तुते ! मंत्र बोल लें। प्रसन्न चित्त से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करें। 
7- देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश के लिए भोग में खीर, बूंदी के लड्डू,सूखे मेवे या फिर मावे से बनी हुई मिठाई रखें एवं आरती करें। पूजन के बाद मुख्य दीपक को रात्रि भर जलने दें।
8- लक्ष्मी जी के मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः । का यथाशक्ति जप करें।
9- पूजन कक्ष के द्वार पर सिन्दूर या रोली से दोनों तरफ स्वास्तिक बना देने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करती हैं।  दीपावली पूजन में श्रीयंत्र की पूजा सुख-समृद्धि को आमंत्रित करती है।
विज्ञापन

10- विद्यार्थी वर्ग इस दिन माता महासरस्वती का मंत्र  "या देवि ! सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै ! नमस्तस्यै ! नमस्तस्यै नमोनमः !! का जप करके शिक्षा प्रतियोगिता में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें