सनातन धर्म में वेद, स्मृति, पुराण सर्वोपरि है एवं पुराणों में आध्यात्मिक त्योहारों की तिथि आगे पीछे होने पर कब त्यौहार मनाया जाए साफ लिखा हुआ है। श्रुति, स्मृति, पुरानोत्तर के प्रमाण ही सर्व परी हैं।
सनातन धर्म में वेद, स्मृति, पुराण सर्वोपरि है एवं पुराणों में आध्यात्मिक त्योहारों की तिथि आगे पीछे होने पर कब त्यौहार मनाया जाए साफ लिखा हुआ है। वेदों पुराणों में लिखा किसी पुस्तक, पंचाग या आर्टिकल या नक्षत्र को देख नहीं टाला जा सकता अमावस्या युक्त प्रतिपदा पर मांगलिक पूजन वर्जित है।
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स्कंद पुराण के कार्तिक महात्म्य के दीपावली महात्म्य अध्याय 9,10,11 अध्यायों में स्वयं ब्रह्मा जी यह व्यवस्था दे रहे हे, जो की दीपावली के लिए ही है। आपसे अनुरोध है स्वयं विवेक का उपयोग कर 31 अक्तूबर को ही दीपावली पूजन करें। यह पंचांग कोई शास्त्र नहीं होते हैं, यह सिर्फ जानकारी लेने के लिए होते हैं इससे ज्यादा कुछ नहीं।
श्रुति - स्मृति - पुराण।
धर्म के निर्णय इनके ही आधार पर होते हैं। ना कि किसी व्यक्तिगत विशेष के पंचांग या उसके आर्टिकल के आधार पर स्कंद पुराण के वैष्णव खंड कार्तिक महात्म्य के दीपावली महात्म्य अध्याय 9,10,11 इन अध्यायो में स्वयं भगवान ब्रह्मा जी यह व्यवस्था दे रहे हैं, जो की दीपावली के लिए ही है।
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स्कंद पुराण- वैष्णव खंड द्वितीय भाग के कार्तिक महात्म्य के दीपावली महात्म्य अध्याय 9 के श्लोक क्रमांक 64 से 68 में स्वयं भगवान ब्रह्मा जी यह कह रहे हैं की त्रयोदशी ,चतुर्दशी और अमावस्या इनका इनका संगव काल हो, तभी दीपावली पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त है। दीपावली का पूजन यदि अमावस्या के साथ प्रतिपदा का जरा सा भी योग हो तो वह लक्ष्मी का नाश करता है और मृत्यु का कारण बनता है।