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Diwali 2022: कौन हैं मां लक्ष्मी का भाई? जानिए इनके बिना क्यों अधूरी होती है हर पूजा

Wed, 19 Oct 2022 01:22 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
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माता लक्ष्मी के भाई के बिना क्यों अधूरी है हर पूजा? - फोटो : amar ujala
Know about Mata Lakshmi Brother on Diwali: प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस बार दिवाली का यह त्योहार 24 अक्तूबर 2022, सोमवार को मनाया जाएगा। दिवाली पर माता लक्ष्मी और श्री गणेश की पूजा आराधना होती है। माता लक्ष्मी  की पूजा से धन-संपन्नता का वरदान प्राप्त होता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार जिस घर में भी माता लक्ष्मी अपने चरण रखती हैं वहां कभी भी रुपए पैसों की कमी नहीं होती। समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी का अवतरण हुआ था। परंतु क्या आप यह जानते हैं कि माता लक्ष्मी अकेले हई नहीं अवतरित नहीं हुईं। उनके भाई का भी अवतरण उनके साथ हुआ। माता लक्ष्मी के भी के बिना मंदिर, अनुष्ठान और धार्मिक स्थलों पर पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए आज आपको बताते हैं कि माता लक्ष्मी का भाई कौन है और उनके प्रयोग से क्या लाभ मिलता है। 
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कैसे हुई शंख की उत्पत्ति 
कैसे हुई शंख की उत्पत्ति 
धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख को माता लक्ष्मी का छोटा भाई माना जाता है। शंख भगवान विष्णु का प्रमुख आयुध है। शंख की ध्वनि आध्यात्मिक शक्ति से संपन्न होती है। शास्त्रों के अनुसार शंख की उत्पत्ति शंखचूर्ण की हड्डियों से हुई है इसलिए इसे पवित्र वस्तुओं में परम पवित्र व मंगलों के भी मंगल माना गया है। शंख कई प्रकार के होते हैं, लेकिन वामावर्ती और दक्षिणावर्ती शंख का ज्यादा महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवती महालक्ष्मी और दक्षिणावर्ती शंख दोनों की ही उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय सागर से हुई, इसलिए शंख को लक्ष्मी का छोटा भाई कहा गया है। 
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क्यों हैं दक्षिणावर्ती शंख शुभ
क्यों हैं दक्षिणावर्ती शंख शुभ
दक्षिणावर्ती शंख के शीर्ष में चन्द्र देवता, मध्य में वरुण, पृष्ठ भाग में ब्रह्मा और अग्र भाग में गंगा, यमुना तथा सरस्वती का वास माना गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार शंख अनेक प्रकार के रूपों में विराजमान होकर देवताओं की पूजा में निरन्तर पवित्र माना जाता है, क्योंकि यह देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अचूक साधन है। इसके पवित्र जल को तीर्थमय माना जाता है। जहां कहीं भी शंखध्वनि होती है, वहां लक्ष्मीजी सम्यक प्रकार से विराजमान रहती हैं। जो शंख के जल से स्नान कर लेता है, उसे सम्पूर्ण तीर्थों में स्नान का फल प्राप्त हो जाता है। जहां पर शंख रहता है, वहां भगवान श्री हरि, भगवती लक्ष्मी सहित सदा निवास करते हैं।
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घर में कब लाएं शंख - फोटो : shankh
घर में कब लाएं शंख?
घर में शंख लाने के लिए शिवरात्रि या नवरात्रि का समय सबसे अच्छा माना जाता है।  लेकिन आप चाहें तो धनतेरस और दिवाली के दिन भी शंख लेकर आ सकते हैं। 
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