दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है। यह कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। गोवर्धन पर्वत को गिरिराज महाराज के नाम से भी जाना जाता है। इन्हे साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है। य़ह घटना उस समय की है जब देवराज इंद्र के प्रकोप से गोकुल वासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। बहुत कम लोग जानते हैं कि त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम ने अवतार लिया था। भगवान श्रीराम जब लंका जा रहे थे उस समय श्रीराम के नेतृत्व में वानर सेना ने समुद्र पर एक पुल का निर्माण किया था। पुल के निर्माण के लिए बहुत से पत्थरों की जरुरत पड़ी थी। हनुमानजी पत्थरों को लाने के लिए हिमालय की ओर गए और वहां से एक पर्वत उठाकर समुद्र की ओर आए। मार्ग में पता चला कि समुद्र पर पुल का निर्माण हो गया है। हनुमानजी ने पर्वत को वहीं जमीन पर रख दिया। तो पर्वत ने हनुमानजी से कहा कि मैं न तो राम के काम आ सका और न ही अपने स्थान पर रह सका।पर्वत की इन बातों को सुनकर हनुमानजी ने कहा कि द्वापर युग में जब भगवान राम श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेंगे, तब वह आपको अपनी उंगली पर उठाकर देवता के रूप में स्थापित करेंगे।इस तरह आप पूज्यनीय हो जाएंगे। हनुमानजी ने गोवर्धन पर्वत को इस तरह देवता बनाने की लीला रची।