धनतेरस खरीदारी का सबसे बड़ा त्योहार होता है। इस दिन धनवंतरी, यमराज और धन की देवी लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है। हर साल यह त्योहार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल धनतेरस 12 नवंबर और 13 नवंबर को मनायी जाएगी। यानि आप दो दिन खरीदारी कर सकते हैं। हालांकि धनतेरस में पूजा का समय प्रदोष के दौरान होता है। इस दिन शाम के समय दीप जलाकर पूजा करने का विधान है। नियमानुसार के अनुसार, धनतेरस के दिन शाम को स्थायी मुहूर्त में मां लक्ष्मी की पूजा करना उत्तम होता है। आइए जानते हैं धनतेरस में पूजा का शुभ मुहूर्त-
धनतेरस अभिजीत मुहूर्त
12 नंवबर को: सुबह 11:20 से 12:04 तक अभिजीत मुहूर्त
13 नंवबर को: सुबह 11:20 से 12:04 तक अभिजीत मुहूर्त
धनतेरस शुभ मुहूर्त (शुक्रवार 13 नवंबर 2020)
इस दिन पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त शायं प्रदोषकाल और स्थिर बृषभ लग्न में 05 बजकर 33 मिनट से 07 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
त्रयोदशी तिथि
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 नवंबर 2020 को रात 09 बजकर 30 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 59 मिनट तक
प्रदोष काल मुहूर्त
13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से रात 08 बजकर 07 मिनट तक
वृषभ काल मुहूर्त
13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 32 मिनट से रात 07 बजकर 28 मिनट तक
भगवान धन्वंतरि की इस विधि से करें पूजा
धनतेरस पूजा के लिए सबसे पहले मिट्टी का छोटा सा हाथी लेकर उसको तिलक करें और एक चौमुख दिया प्रज्जवलित करें। साथ ही भगवान धन्वंतरि तथा भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दीपक दिखाएं और इस मंत्र का जाप करें:
मंत्र
मृत्युना दंडपाशाभ्यां कालेन श्याम्या सह|
त्रयोदश्यां दीप दानात सूर्यज प्रीयतां मम ||
खरीदे गए सामान पर लगाएं अक्षत
धनतेरस पर जो भी नया सामान खरीदकर लाए हैं, उस पर अक्षत रखें और पान के पत्ते पर कुमकुम से स्वास्तिक बना कर एक सुपारी रख कर गणपति महाराज की पूजा करें। लक्ष्मी जी का ध्यान करके पान का पत्ता उठा कर अपने तिजोरी में रख लें। इस उपाय से वर्ष भर भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की कृपा आप पर बनी रहेगी। साथ ही मुख्य द्वार पर, रसोई में, ब्रह्म स्थान और घर के सभी दरवाजों के दाहिनी ओर एक दीपक जरूर प्रज्जवलित करें।