धनतेरस जिसे धनत्रयोदशी, धन्वंतरि त्रियोदशी और धन्वंतरि जयंती आदि नामों से जाना जाता है 13 नवंबर को है। धनतेरस पांच दिनों तक चलने वाले दीपावली महापर्व का पहला दिन होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर समुद्र मंथन के दौरान आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वतरि प्रगट हुए थे। इनके अलावा इस तिथि पर समुद्र मंथन के दौरान धनतेरस के दिन ही माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर भी प्रगट हुए थे। धनतेरस के दिन घर में कुछ नई वस्तु खरीद कर ले आने का महत्व होता है। जिसमें मुख्य रूप से लोग सोने-चांदी से बनी वस्तुएं या फिर कोई भी उपयोग की वस्तु खरीदकर घर लाते हैं। मान्यता है कि इस दिन इन वस्तुओं को खरीदने से मां लक्ष्मी की कृपा पूरे साल बनी रहती है। इसके अलावा भगवान धन्वंतरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है इस दिन जो भी शुभ चीज की खरीदारी होती है उसमें 13 गुने की बढ़ोतरी होती है।
धनतेरस का त्योहार कब है
धनतेरस पांच दिनों तक चलने वाले दीपावली महापर्व का पहला दिन होता है। यह हर साल दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है। इस बार धनतेरस दिवाली के एक दिन पहले यानी 13 नवंबर को मनाया जा रहा है।
शुभ मुहूर्त- धनतेरस, शुक्रवार 13 नवंबर 2020
इस दिन पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त शायं प्रदोषकाल और स्थिर बृषभ लग्न में 05 बजकर 33 मिनट से 07 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
त्रयोदशी प्रदोष काल और वृषभ काल तिथि
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 नवंबर 2020 को रात 09 बजकर 30 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 59 मिनट तक
प्रदोष काल प्रारंभ: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से रात 08 बजकर 07 मिनट तक
वृषभ काल प्रारंभ: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 32 मिनट से रात 07 बजकर 28 मिनट तक
भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि
13 नवंबर 2020 को धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि और कुबेर की विशेष पूजा होगी। धनतेरस पूजा के लिए सबसे पहले मिट्टी का छोटा सा हाथी लेकर उसको तिलक करें और एक चौमुख दिया प्रज्जवलित करें। साथ ही भगवान धन्वंतरि तथा भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दीपक दिखाएं और इस मंत्र का जाप करें:
मृत्युना दंडपाशाभ्यां कालेन श्याम्या सह|
त्रयोदश्यां दीप दानात सूर्यज प्रीयतां मम ||
इसके पश्चात जो भी नया सामान खरीदकर लाए हैं, उस पर अक्षत रखें और पान के पत्ते पर कुमकुम से स्वास्तिक बना कर एक सुपारी रख कर गणपति महाराज की पूजा करें। लक्ष्मी जी का ध्यान करके पान का पत्ता उठा कर अपने तिजोरी में रख लें। इस उपाय से वर्ष भर भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की कृपा आप पर बनी रहेगी। साथ ही मुख्य द्वार पर, रसोई में, ब्रह्म स्थान और घर के सभी दरवाजों के दाहिनी ओर एक दीपक जरूर प्रज्जवलित करें।
धनतेरस पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- धनतेरस के दिन कुछेक बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मसलन, अगर आपने किसी से कर्ज लिया है तो जितना भी संभव हो सके, उसे लौटा दीजिए।
- धनतेरस के दिन भूलकर भी किसी से कर्ज न लें। साथ ही क्रोध करने से बचें और यदि किसी से कोई नाराजगी है तो उसे इस शुभ दिन जरूर दूर कर लीजिए।