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Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि का आठवां दिन है मां महागौरी को समर्पित, जानिए पूजा विधि और मंत्र

Wed, 25 Mar 2026 07:04 PM IST
Vinod Shukla धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी के स्वरूप की पूजा का विधान होता है। अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। 
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Navratri 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि का आठवां दिन मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की आराधना को समर्पित होता है। यह दिन साधना, पवित्रता और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और कल्याणकारी है, जो भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का संचार करता है।
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मां महागौरी का दिव्य स्वरूप
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर और उज्ज्वल है। उनकी कांति शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल के समान मानी गई है। इनके सभी वस्त्र और आभूषण श्वेत रंग के होते हैं, जो शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक हैं। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी जाती है, जिससे इन्हें बालरूप में भी पूजा जाता है।

वृषभ वाहन और चार भुजाओं का महत्व
मां महागौरी वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं। इनके चार भुजाएं हैं। ऊपरी दाहिने हाथ में अभय मुद्रा, जो भय का नाश करती है; नीचे के दाहिने हाथ में त्रिशूल, जो दुष्ट शक्तियों के विनाश का प्रतीक है। ऊपर के बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर मुद्रा होती है, जो भक्तों को वरदान प्रदान करती है। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत और करुणामयी है।
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मां महागौरी के नाम की पौराणिक कथा
पार्वती रूप में देवी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी इस तप की महिमा का वर्णन किया है।

“जन्म कोटि लगि रैगर हमारी, बरउँ संभु न त रहउ कुंआरी।”
इस कठिन तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगाजल से उनके शरीर को पवित्र किया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत गौर और कांतिमय हो गया। इसी कारण उन्हें ‘महागौरी’ कहा गया।

अन्नपूर्णा स्वरूप और कन्या पूजन का महत्व
मां महागौरी को अन्नपूर्णा का स्वरूप भी माना जाता है। अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष विधान है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है। यह परंपरा देवी के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।

पूजा से प्राप्त होने वाले फल
मां महागौरी की उपासना से साधक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। उपासक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी दुख, कष्ट एवं बाधाएं दूर हो जाती हैं। उनकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
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