आदिशक्ति के नौ रूपों में प्रमुख श्रीमहाकाली, श्रीमहालक्ष्मी और श्रीमहासरस्वती प्रमुख हैं। इनमें श्री महाकाली की आराधना से दुःख-दारिद्रता से मुक्ति, श्री महालक्ष्मी की आराधना से धन, ऐश्वर्य और सुख समृद्धि तथा श्री महासरस्वती की आराधना शिक्षा-प्रतियोगिता में सफलता उत्तम ज्ञान, ब्रह्मज्ञान तथा निर्मल मन की प्राप्ति होती है। विद्या के पुजारियों को वासंतिक नवरात्रि में इन्हीं मां सरस्वती की आराधना करके किसी भी तरह की कामयाबी हासिल की जा सकती है। नव संवत्सर के आरंभ में शक्ति आराधना का पावनपर्व वासंतिक नवरात्रि 13 अप्रैल मंगलवार से आरम्भ हो रहा है जो 21 अप्रैल को उदयकालीन नवमी तिथि और पुष्य नक्षत्र में संपन्न होगा। व्रत की पारणा 22 अप्रैल बृहस्पतिवार को होगी।
वासंतिक नवरात्रि में मां सरस्वती की आराधना का विशेष फल मिलता हैं क्योंकि इसी ऋतु में इनका प्राकट्यपर्व भी मनाया जाता है। बसंतऋतु को मधुमास भी कहा जाता है। इस ऋतु में न तो अधिक सर्दी पड़ती है और न ही अधिक गर्मी। इसी मौसम में संसार के लगभग सभी वृक्ष पुरानी पत्तियों को त्यागकर नई पत्तियों व पुष्प को जन्म देते हैं । सृष्टि में जड़ता तोड़कर चेतनता प्रदान करने वाली माँ सरस्वती का वासंतिक नवरात्रि जो कोई भी श्रद्धा-विश्वास से पूजन करता है, वह विद्या व ज्ञान प्राप्त करता है उसके सभी कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है।
वह परीक्षा अथवा प्रतियोगिताओं में कभी फेल नहीं होता। मां को प्रसन्न करने का ध्यान और मंत्र इस प्रकार है।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता । या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता । सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।
मंत्रार्थ- जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्रधारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली मां सरस्वती हमारी रक्षा करें।
ध्यान मंत्र के बाद मां का यह अमोघ मंत्र- या देवि ! सर्व भूतेषु विद्यारुपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।। का जप करना अति शुभफल दायक रहेगा।
तीनों लोकों चौदह भुवनों सहित इस चराचर जगत में छाये अंधकार को दूर करने की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की भक्ति पूर्वक पूजा-आराधना करने से ज्ञानरूपी धन की प्राप्ति तो होती है, अज्ञानता का अन्धकार भी नष्ट हो जाता है। आदिशक्ति से प्रादुर्भूत माँ सरस्वती की अनुकम्पा से जड़ता में भी चेतनता का संचार होने लगता है। विद्यार्थियों एवं प्रतियोगिता बैठने वाले छात्रों के लिए माँ की आराधना करके सफलता पाने का
श्रेष्ठ अवसर है।