शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा प्रत्येक नवरात्र पर्व के प्रथम दिन अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर अपने भक्तों को वरदान देने आती हैं। उनके वाहन के अनुसार ही मेदिनी ज्योतिष के फलित का विश्लेषण किया जाता है। वर्तमान रूद्रविंशति में प्रमादी नामक संवत्सर के मध्य पड़ने वाले बासन्तिक नवरात्र 25 मार्च, बुधवार को मां दुर्गा नौका पर सवार होकर भक्तों के घर पधारने वाली हैं।
'शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च डोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता'।
गजे च जलदा देवी छत्र भंगस्तुरंगमे। नौकायां सर्वसिद्धि स्यात डोलायां मरण ध्रुवम्।
अर्थात-
- रविवार और सोमवार को नवरात्रि का शुभारम्भ हो तो मां दुर्गा का वाहन हाथी है जो अत्यंत जल की वृष्टि कराने वाला संकेत होता है।
- शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो माँ का आगमन घोड़ा (तुरंग) पर होता जो राजा अथवा सरकार के परिवर्तन का संकेत देता है।
- गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि का प्रथम दिन पड़े तो मां का आगमन डोली में होता है जो जन-धन की हानि, ताँडव, रक्तपात होना बताता है।
- यदि नवरात्र का शुभारम्भ बुधवार हो तो माँ दुर्गा 'नौका' पर विराजमान होकर आती हैं और अपने सभी भक्तों को अभीष्ट सिद्धि देती है।
वर्तमान में 25 मार्च बुधवार से आरंभ होने वाले नवरात्रि के दिन मां दुर्गा नौका पर सवार होकर अपने भक्तों के घर आ रही हैं जो सभी मनोरथ पूर्ण करेंगी।
कलश स्थापना मुहूर्त 2020
मुहूर्त शास्त्रों के अनुसार शिव की पूजा-आरधना चर लग्न में, विष्णु की स्थिर एवं दुर्गा की आरधना द्विस्वभाव लग्न में करना श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मिथुन, कन्या, धनु तथा मीन द्विस्वभाव राशियां कही गयी हैं, इन लग्नों की उपस्थिति में कलश स्थापन श्रेष्ठ माना गया है।
इसके अतिरिक्त कलश स्थापन चक्रसुदर्शन मुहूर्त (अभिजित)में भी करना श्रेष्ठ माना गया हैं। यदि अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना कर पाना संभव न हो तो अनुकूल लाभ, शुभ और अमृत चौघडिया श्रेष्ठ मानी गयी है।
यदि किसी संयोगवश, इनमे भी आप कलश स्थापना न कर पायें तो सोम, बुध, गुरु और शुक्र में से किसी की भी होरा में कलश स्थापना का सकते हैं।
25 मार्च प्रतिपदा के दिन रेवती नक्षत्र और ब्रह्म योग होने के कारण सूर्योदय से लेकर अभिजीत मुहूर्त की समाप्ति तक कलश स्थापना करना चाहिए। यद्यपि चैत्र प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 24 मार्च मंगलवार को दोपहर बाद 2 बजकर 55 मिनट से ही आरंभ हो जाएगा किन्तु ये 25 मार्च को शाम 05 बजकर 25 मिनट तक रहेगा, इसलिए प्रतिपदा 25 को ही मानी जायेगी।
शक्ति आराधना में श्रेष्ठ लग्न मीन इसदिन सूर्योदय से 07 बजकर 16 मिनट तक के मध्य है इसलिए यह प्रथम मुहूर्त परमशुभ है इस अवधि के मध्य शक्ति आराधना के लिए श्रेष्ठ बुध की भी होरा है अतः हर तरह से इसदिन का प्रथम मुहूर्त और भी शुभ हो गया है। दूसरी द्विस्वभाव वाली मिथुन लग्न समय- 10 बजकर 47 से 01 बजकर 01 मिनट है इसी अवधि के मध्य अभिजीत मुहूर्त 11.58 से 12.49 तक है और राहुकाल- 12.27 से 13.59 तक है अतः दोपहर 12 बजकर 27 तक ही कलश स्थापन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।