Basant Panchami 2024: जीवन में किसी भी प्रकार की नई शुरुआत के लिए बसंत पंचमी का श्रेष्ठ मुहूर्त माना गया है। शास्त्रों के अनुसार यह दिन मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है और इसलिए इस दिन ज्ञान प्राप्ति के लिए उनकी आराधना की जाती है। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वह संगीत की देवी भी हैं। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पचंमी के दिन तुम्हारी आराधना की जाएगी। इस कारण हिंदू धर्म में बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इस दिन किए गए मां के पूजन करने से बुद्धि और धन की निरंतर प्राप्ति होती है। देवी भागवत में उल्लेख है कि माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही संगीत,काव्य,कला,शिल्प,रस,छंद,शब्द व शक्ति की प्राप्ति जीव को हुई थी। सरस्वती को प्रकृति की देवी की उपाधि भी प्राप्त है। पद्मपुराण में मां सरस्वती का रूप प्रेरणादायी बताया गया है।
ऐसा हैं विद्या की देवी मां सरस्वती का स्वरूप
- सरस्वती के सभी अंग श्वेताभ हैं,जिसका तात्पर्य यह है कि सरस्वती सत्वगुणी प्रतिभा स्वरूपा हैं। इसी गुण की उपलब्धि जीवन का अभीष्ट है।
- मां सरस्वती हमेशा सफेद वस्त्रों में होती हैं। इसके दो संकेत हैं पहला हमारा ज्ञान निर्मल हो, विकृत न हो। जो भी ज्ञान अर्जित करें वह सकारात्मक हो। दूसरा संकेत हमारे चरित्र को लेकर है। विद्यार्थी जीवन में कोई दुर्गुण हमारे चरित्र में न हो। वह एकदम साफ हो।
- मां सरस्वती के एक हाथ में कमल है। कमल गतिशीलता का प्रतीक है। यह निरपेक्ष जीवन जीने की प्रेरणा देता है।कमल से ये भी संदेश मिलता है कि हमारे चारों तरफ कैसा भी वातावरण क्यों न हो, उसका प्रभाव हमारे तन-मन पर नहीं आना चाहिए। शुद्ध मन में ही ईश्वर का निवास होता है।
- देवी के हाथ में पुस्तक सभी कुछ जान लेने,सभी कुछ समझ लेने की सीख देती है। शिक्षा और ज्ञान से ही सबका उत्थान संभव है, इसलिए जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए जितना संभव हो, उतना ज्ञान अर्जित करें।
- धर्मशास्त्रों के अनुसार मां सरस्वती का वाहन सफेद हंस है। दूध और पानी को अलग करने की शक्ति हंस में होती है। देवी भागवत के अनुसार,सरस्वती को ब्रह्मा,विष्णु और महेश के द्वारा पूजा जाता है।जो सरस्वती की आराधना करता है,उसमें सरस्वती के वाहन हंस के नीर-क्षीर-विवेक गुण अपने आप ही आ जाते हैं।
- मां के दो हाथों में वीणा ललित कला में प्रवीण होने की प्रेरणा देती है। जिस प्रकार वीणा के सभी तारों में सामंजस्य होने से मधुर संगीत निकलता है वैसे ही मनुष्य अपने जीवन में सफल होने के लिए मन व बुद्घि का सही तालमेल रखना चाहिए।
- माता सरस्वती के एक हाथ में माला है, यह बताती है कि हमें हमेशा चिंतन में रहना चाहिए, जो ज्ञान अर्जित कर रहे हैं, उसका लगातार मनन करते रहें, इससे आपकी मेधा बढ़ेगी।
- पुराणों में चित्र के माध्यम से देवी सरस्वती को नदी किनारे एकांत में बैठे दिखाया गया है, यह संकेत है कि विद्यार्जन के लिए एकांत भी आवश्यक है। विद्यार्थी को थोड़ा समय एकांत में भी बिताना चाहिए।