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Amla Navami 2022: जानिए आज आंवला नवमी की पूजाविधि, कथा, महत्व और शुभ मुहूर्त

Wed, 02 Nov 2022 12:04 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिवजी का निवास होता है । इस दिन इस वृक्ष के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है।
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amala navmi 2022: सूर्योदय से पूर्व स्नान करके आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। आंवले की जड़ में दूध चढ़ाकर रोली, अक्षत , पुष्प, गंध आदि से पवित्र वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें। - फोटो : istock
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विस्तार
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Amla Navami 2022 Date : आज कार्तिक माह की नवमी तिथि और इस तिथि पर आंवला नवमी का त्योहार है। कार्तिक मास  के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। द्वापर युग की शुरुआत कार्तिक शुक्ल नवमी को हुई थी ,यह युगादि तिथि है। आज के ही दिन श्री विष्णु ने कुष्मांडक दैत्य को मारा था। जिसके रोम से कुष्मांड-सीताफल की बेल निकली थी ,इसीलिए इसे कुष्मांडक नवमी भी कहा जाता है। देखा जाए तो यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का भारतीय संस्कृति का पर्व है क्योंकि आंवला पूजन पर्यावरण के महत्व को दर्शाता है ,जागरूक करता है। प्रदूषण आदि से शरीर कि रक्षा करता है। इस दिन आंवले के पेड़ का पूजन कर परिवार के लिए आरोग्यता व सुख -समृद्धि की कामना की जाती है । इस दिन किया गया तप, जप , दान इत्यादि व्यक्ति को सभी पापों से मुक्त कर मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिवजी का निवास होता है । इस दिन इस वृक्ष के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है।
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पूजाविधि
सूर्योदय से पूर्व स्नान करके आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। आंवले की जड़ में दूध चढ़ाकर रोली, अक्षत , पुष्प, गंध आदि से पवित्र वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें। तत्पश्चात आंवले के वृक्ष की सात परिक्रमा करने के बाद दीप प्रज्वलित करें। उसके उपरांत कथा का श्रवण या वाचन करें।

कथा
आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष की पूजा और इसके वृक्ष के नीचे भोजन करने की परंपरा शुरू  करने वाली माता लक्ष्मी मानी जाती हैं । कथा प्रसंग के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आईं। रास्ते में भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा एकसाथ करने की उनकी इच्छा हुई । लक्ष्मी माँ ने विचार किया कि एक साथ विष्णु और शिव की पूजा कैसे हो सकती है। तभी उन्हें ख्याल आया  कि तुलसी और बेल के  गुण एक साथ आंवले में पाया जाता है । तुलसी श्री हरि विष्णु को अत्यंत  प्रिय है और बेल भगवान भोलेनाथ  को अतः आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिह्न मानकर माँ लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष की पूजा संपन्न की ।माँ लक्ष्मी की  पूजा से प्रसन्न होकर श्री विष्णु और शिव प्रकट हुए । लक्ष्मी  माता ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर विष्णु और भगवान शिव को भोजन कराया । इसके बाद स्वयं ने भोजन किया । उस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी का दिन था  । तभी से आंबला वृक्ष पूजन की यह परम्परा चली आ रही है । अक्षय नवमी के दिन यदि  आंवले की पूजा करना और इसके  नीचे बैठकर भोजन बनाना और खाना संभव नहीं हो तो इस दिन आंवला ज़रूर खाएं ।
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धार्मिक ग्रंथों में आंवले का महत्व
पद्म पुराण के अनुसार यह पवित्र फल भगवान श्री विष्णु को प्रसन्न करने वाला व शुभ माना गया है। इसके भक्षण मात्र से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाते हैं ।आंवला खाने  से आयु  बढ़ती है , उसका रस पीने से धर्म -संचय होता है  और उसके जल से स्नान करने से दरित्रता दूर होती है तथा सब प्रकार के ऐश्वर्य प्राप्त होते हैं । आंवले का दर्शन , स्पर्श तथा उसके नाम का उच्चारण करने से वरदायक भगवान  श्री विष्णु अनुकूल हो जाते हैं । जहां आंवले का फल मौजूद होता है , वहाँ भगवान श्री विष्णु सदा विराजमान रहते हैं तथा उस घर में ब्रह्मा एवं सुस्थिर लक्ष्मी का वास होता है । इसलिए अपने घर में आंवला अवश्य रखना चाहिए।
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आंवला नवमी शुभ मुहूर्त-
नवमी तिथि प्रारम्भ - 1 नवम्बर, मंगलवार को रात 11 बजकर 04 मिनट से शुरू
नवमी तिथि समाप्त - 2 नवम्बर, बुधवार को रात 9 बजकर 9 मिनट तक
आंवला नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 06:34 से दोपहर 12:04 बजे तक

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