स्थायी धन और सौभाग्य हासिल होता है
अक्षय तृतीया के दिन सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है जो समृद्धि का प्रतीक है। सोना-चांदी को धन-धान्य की देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन इनकी खरीदारी को स्थायी धन और सौभाग्य की प्राप्ति के रूप में देखा जाता है। हिंदू धर्म में पीली धातु सोने को सबसे पवित्र और अक्षय माना गया है। इसे देवताओं की धातु माना जाता है इसलिए अक्षय तृतीया पर सोने की खरीदारी की परंपरा है। पद्म पुराण के अनुसार इस तिथि पर धन के देवता कुबेर को देवताओं का खजांची बनाया गया था। इस तिथि पर लक्ष्मी पूजा भी होती है जिससे जीवन में स्थायी समृद्धि आती है।
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इस दिन खरीदा गया सोना समृद्धि देने वाला
इस दिन ग्रहों की शुभ स्थिति बनने से हर तरह की खरीदारी और नई शुरुआत लंबे समय तक फायदा देने वाली रहेगी। स्कंद पुराण के अनुसार अक्षय तृतीया पर खरीदा गया सोना समृद्धि देने वाला होता है। इसी तरह धनतेरस, रथ सप्तमी गुरु पुष्य और रवि पुष्य योग भी सोना खरीदने का विशेष मुहूर्त है। ग्रंथों में बताया गया है सोना पूर्व या उत्तर दिशा से खरीदना चाहिए। ब्रह्मांड पुराण के अनुसार उत्तर दिशा से खरीदा गया सोना शुभ फल देता है। इससे आत्मविश्वास और सकारात्मकता में वृद्धि होती रहती है। ऐसी स्थिति में की गई नई शुरुआत समृद्धि देने वाली होती है।
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ऐसे करें इस दिन अपने पुण्यों में वृद्धि
अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर समुद्र,गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी की शांत चित्त होकर पूजा करने का विधान है। इस दिन लक्ष्मीनारायण की पूजा सफ़ेद,पीले रंग के कमल या गुलाब के पुष्प से करनी चाहिए। नैवेद्ध में गेहूं,जौ,चने का सत्तू,मिश्री,नीम की कोपल,ककड़ी और चने की भीगी दाल अर्पित की जाती है। यह तिथि वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु के प्रारम्भ का दिन भी है इसलिए अक्षय तृतीया के दिन जल से भरे घड़े,कुल्हड़,सकोरे,पंखे,पादुका,चटाई,छाता,चावल,नमक,घी,ख़रबूज़ा,ककड़ी,मिश्री,सत्तू आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान महा पुण्यकारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन दान देने वाला प्राणी सूर्यलोक को जाता है। जो इस तिथि को उपवास करता है वह रिद्धि-वृद्धि और श्री से संपन्न हो जाता है।