Amavasya Dates 2025: अमावस्या तिथि हिंदू धर्म में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या 30 दिन में आती है, जो कृष्ण पक्ष की आखिरी तिथि होती है। इस दिन आकाश में चांद नजर नहीं आता है। हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितृ लोक से हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं। इस दिन श्राद्ध कर्म और तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। अन्न, वस्त्र, और धन का दान पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए किया जाता है, जो परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए अनुकूल होता है।
हर माह में एक अमावस्या आती है। इनमें शनि अमावस्या और सोमवती अमावस्या का महत्व अधिक है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दो बार शनि अमावस्या और एक बार सोमवती अमावस्या आएगी। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2025 में कब-कब अमावस्या तिथि आएगी।
2025 में पड़ने वाली अमावस्या तिथि लिस्ट
| तिथि |
अमावस्या का नाम |
| जनवरी 29, 2025, बुधवार |
दर्श अमावस्या (माघ अमावस्या) |
| फरवरी 27, 2025, बृहस्पतिवार |
दर्श अमावस्या (फाल्गुन अमावस्या) |
| मार्च 29, 2025, शनिवार |
चैत्र अमावस्या (दर्श अमावस्या) |
| अप्रैल 27, 2025, रविवार |
दर्श अमावस्या (वैशाख अमावस्या) |
| मई 27, 2025, मंगलवार |
ज्येष्ठ अमावस्या |
| जून 25, 2025, बुधवार |
दर्श अमावस्या (आषाढ़ अमावस्या) |
| जुलाई 24, 2025, बृहस्पतिवार |
दर्श अमावस्या (श्रावण अमावस्या) |
| अगस्त 23, 2025, शनिवार |
भाद्रपद अमावस्या |
| सितंबर 21, 2025, रविवार |
दर्श अमावस्या (आश्विन अमावस्या) |
| अक्तूबर 21, 2025, मंगलवार |
दर्श अमावस्या (कार्तिक अमावस्या) |
| नवंबर 20, 2025, बृहस्पतिवार |
मार्गशीर्ष अमावस्या |
| दिसंबर 19, 2025, शुक्रवार |
दर्श अमावस्या (पौष अमावस्या) |
अमावस्या का दिन केवल श्राद्ध कर्म तक ही सीमित नहीं है; इसे ध्यान, साधना, और दान के लिए भी आदर्श माना जाता है। आप अमावस्या के दिन पितरों के नाम पर अन्न और धन का दान कर सकते हैं, इससे पितरों का आशीर्वाद आप पर बना रहता है। इसके अलावा, इस दिन नदी या पवित्र जल में स्नान करना और भगवान विष्णु तथा शिव की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी होता है। साल 2025 में अमावस्या की तिथियां धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। श्राद्ध और दान जैसे कार्यों से पितृ दोष शांत होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए, इस दिन को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है और अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
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