संयुक्त परिवार में पल रही मुनिया मात्र छह साल की थी जब उसके पिता का देहांत हो गया। हालात से समझौता करते हुए मां उसकी शादी छोटी उम्र में ही करने का मन बना रही थीं। अपने परिवार की तकलीफें कम करने की मन में ठाने हुए मुनिया आगे पढ़ने के लिए जिद ठाने थी। श्रावस्ती के इकौना ब्लॉक के दसियायपुर गांव की मुनिया ने अपने बड़े पापा (ताऊ) से अपने दिल की बात की और वे उसे आगे पढ़ाने के लिए राजी हो गए।
पिता के न रहने के बाद तीन बच्चों को पालना और उनकी पढ़ाई को आगे बढ़ाना मुनिया की मां के लिए खासी बड़ी चुनौती थी। संयुक्त परिवार में सौ आशंकाएं, लेकिन मुनिया के ताऊ अपने छोटे भाई की बेटी की आगे की पढ़ाई जारी रखने की जिद के साथ खड़े हुए।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।