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स्मार्ट बेटियां: पुलिस सेवा में जाने की जिद है मीरा की, खुद पढ़ती भी है और पढ़ाती भी है

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Tue, 06 Nov 2018 01:43 PM IST
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मीरा देवी - फोटो : अमर उजाला

भाई की पढ़ाई जारी रखनी थी इसलिए मीरा की पढ़ाई आठवीं के बाद रुकवा दी गई। सवाल पूछा तो मां ने कहा, तुम्हें करना ही क्या है, आगे चलकर तो शादी करके दूसरे घर ही जाना है। बलरामपुर जिले के बघनी गांव की मीरा इस तरह पढ़ाई रुकने पर रूठकर मामा के घर चली गई। वहीं रहकर छोटे बच्चों की कोचिंग की और अपनी पढ़ाई जारी रखी। फिर 12वीं पास करके ही घर वापस लौटी।



पुलिस सेवा में जाने का सपना संजोए मीरा कोचिंग करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखे है। लड़कियां हर क्षेत्र में आज लड़कों से आगे बढ़ रही हैं—  यह कहकर वह उस सोच को चुनौती देती है जो मानती है कि लड़कियां कुछ नहीं कर सकती हैं, आगे तो लड़कों को बढ़ाना चाहिए।


मीरा कहती है कि मेरे  दिमाग में साफ है कि अगर अपने सपनों को उड़ान देनी है तो फिर कुछ अलग करना होगा। चार साल ननिहाल में रहकर पढ़ाई करके लौटी मीरा अब दिन में एक स्कूल में पढ़ाती है, फिर 12 किमी साइकिल चलाकर कोचिंग पढ़ने जाती है, रात में लौटकर फिर अपनी पढ़ाई करती है। उसे अपना ग्रेजुएशन पूरा करना है। उसके बाद सब-इंस्पेक्टरी की तैयारी करनी है। आज के गांव की मानसिकता पर टिप्पणी करती है मीरा, यह कहकर कि एक लड़की को आगे बढ़ने के लिए अपने घरवालों और समाज, दोनों से जूझना पड़ता है। जूझ कर आगे बढ़ रही है मीरा।


घर-समाज से मोर्चा लेकर आगे बढ़ रही मीरा की यह वीडियो कथा बनाई है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी सुमन ने।


अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा  अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

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