वह अक्सर देखते थे कि उनकी क्लास में कई बच्चियां अचानक गैर हाजिर होने लगती हैं। वे चुपके से स्कूल आना बंद कर देती हैं। बाद में पता लगता था कि उनकी तो शादी तय हो गई है इसलिए घरवालों ने उनकी पढ़ाई बंद करवा दी !
उत्तर प्रदेश का जिला श्रावस्ती। जमुनोहा ब्लॉक का परसोहना गांव। यहां रहने वाले शिक्षामित्र संतराम वर्मा की टीस यह है कि उनके ब्लॉक में उनकी नौजवान शिष्याएं अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं। वे कुछ बनने का सपना तक नहीं देख पातीं और उनकी सगाई हो जाती है। फिर कच्ची उम्र में ही हाथ पीले और फिर मातृत्व, कमजोरी, कुपोषण और बीमारियां ..धीरे धीरे एक नन्ही जान जिंदगी की चक्की में पिस कर रह जाती है।
संतराम ने अब बच्चियों को बचाने के लिए उनके माता-पिताओं के हृदय परिवर्तन की अलख जगाई। अब उन्होंने बाल विवाह को रोकने के लिए नियमित तौर पर गांव वासियों से मिलने लगे उनके घरों में जाने लगे हैं। वह बच्चियों के मां-बाप के साथ बतियाते हैं। उन्हें समझाते हैं कि किस तरह बाल विवाह बच्चियों के शरीर और उनकी आत्मा को एक साथ बीमार कर रहा है। उनका यह अभियान रंग ला रहा है। वे गर्व से बताते हैं कि लोगबाग उनकी बातों को गंभीरता से ले रहे हैं। कई बच्चियां विवाह की चक्की से बचाई जा सकी हैं।
स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी दीप्ति श्रीवास्तव ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान `स्मार्ट बेटियां` के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।