कच्ची उम्र में शादी होने पर लड़की जल्दी ही मां बन जाती है। जब वह खुद ही बच्ची होती है तो दूसरी बच्ची की देखभाल वह कैसे कर पायेगी। इसी समझ के साथ श्रावस्ती के खावाकला गांव की शारदा देवी तमाम दिक्कतों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखे है।
गांव की अपनी अनेक साथियों की छोटी उम्र में शादी होती देखी है शारदा ने। यह भी देखा उसने कि शादी के बाद उन लड़कियों की पढ़ाई छूट गई। इसी से सबक लेकर उसने अपनी पढ़ाई को जारी रखने की जिद ठाने रखी। आंख में थोड़ी तकलीफ के बावजूद शारदा के इरादों में कोई कमी नहीं है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।