इकौना ब्लॉक के अन्धरपुरवा गांव की मीरा ने अपने पैरों पर खड़े होने की जिद के चलते अपना बाल विवाह रुकवाया। बाल विवाह के खतरों के बारे में माता-पिता से लगातार तकरार करके उसने पढ़ाई जारी रख पाने का माहौल घर में बनाया।
मीरा आज खुश है कि उसकी पढ़ाई जारी है और वह कुछ बनकर दिखायेगी। वह बखूबी जानती है कि कम उम्र में शादी के बाद होने वाले बच्चे भी बीमार रहते हैं और मां भी। उसने ठान रखा है कि अपने विकसित व्यक्तित्व के बल पर उसका जीवन संवरेगा, तब ही उसका विवाह होगा।
स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी गेंदा देवी ने यह वीडियो कथा बनाई है।अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।