वकील पिता की बेटी प्रतिभा की प्रतिभा दबी ही रह जाती अगर उसने जिद न ठानी होती। कुछ बनकर अपने माता- पिता का नाम रोशन करने की जिद ठाने प्रतिभा 12 किमी साइकिल चलाकर 12वीं क्लास की पढ़ाई के लिए अपने विद्यालय जाती है। श्रावस्ती के शाहपुर बरगदवा गांव की प्रतिभा स्टाफ नर्स बनना चाहती है।
कम उम्र में ही उसकी शादी करने की जिद कर रहे पिता से प्रतिभा ने कहा कि छोटी उम्र में शादी से न तो मेरा शारीरिक विकास ही हो पायेगा और न मानसिक विकास। लड़कियों को मौका तो दीजिए, वे लड़कों से आगे बढ़कर दिखायेंगी। दो टूक शब्दों में कहती है प्रतिभा कि आज के समय में लड़का-लड़की, दोनों को ही कमाना चाहिए, दोनों में भेद खत्म होना चाहिए। प्रतिभा के संकल्प और सवालों की वीडियो कथा बनाई है स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी मालती देवी ने।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।