भारत में तेजी से पांव पसार रहे जानलेवा जीका वायरस का एंटीडॉट तैयार करना वैज्ञानिकों के लिए आसान होगा। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने वायरस के प्रोटीन के खतरनाक हिस्सों की पहचान करने में बड़ी सफलता पाई है। जीका वायरस की प्रोटीन संरचना को बारीकी से समझने के लिए एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम इजाद किया है, जिससे इस वायरस संक्रमण के उपचार का प्रारूप तैयार करने में बड़ी मदद मिलेगी।
शोध को हाल ही अमेरिका के जर्नल ऑफ मोलेक्यूलर बायोलॉजी ने हरी झंडी देते हुए प्रकाशित किया है। जिससे वैज्ञानिकों को वायरस की सरंचना बारीकी से समझने और एंटीडॉट तैयार तैयार करने में मदद मिलेगी। आईआईटी मंडी के बायोलाजी विभाग के प्रोफेसर व शोधकर्ता डॉ. रजनीश गिरी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इस शोध में साउथ फ्लोरिडा के व्लादिमीर और रिसर्च स्कॉलर पुष्पेंद्र मणि मिश्र उनके सहयोगी रहे हैं। गौरतलब है कि अफ्रीका से एशिया तक कहर बनाने वाले इस बीमारी के इलाज को लेकर दुनियाभर में शोध चले हैं।
आईआईटी मंडी के इस शोध से जीका प्रोटीन में इस असामान्य और एमओआरएफ साइट की पहचान और इस विश्लेषण से वायरल प्रोटीन के विशेष हिस्से को समझने में मदद मिलेगी। दरअसल इसकी वजह से वायरस और मरीज के बीच आपसी गतिविधि होती है। संक्रमण के दौरान और कुछ विशेष गतिविधियों जैसे कि वायरस के रेगुलेशन और मोलेक्यूलर संकेत मिलने के दौरान ऐसा होता है।
फीचर एनेलाइजिंग कंप्यूटेशनल टूल्स का उपयोग
डॉ. गिरी के मुताबिक मोलेक्यूलर रिकग्निशन फीचर एनेलाइजिंग कंप्यूटेशनल टूल्स का उपयोग करते हुए जीका वायरस के प्रोटीन में एमओआरएफ साइट्स की पहचान की है। उन्होंने बतौर रेफरेंस यूनीप्रॉट नामक जीका वायरस प्रोटीन डाटाबेस से प्राप्त जानकारी का उपयोग करते हुए जीका के एक खास स्ट्रेन प्रोटीन सीक्वेंस की पुष्टि की है।
यह है जीका वायरस
जीका वायरस फ्लेविविरेड नामक वायरस परिवार का सदस्य है। वायरस की पहचान सबसे पहले यूगांडा में 1947 मे हुई थी। यह वायरस संक्रमित एडीज नामक मच्छर की प्रजाति के काटने से फैलता है। इसी तरह के मच्छर डेंगू बुखार, येलो फीवर और चिकनगुनिया वायरस भी फैलाते हैं। इसके अलावा जीका वायरस सेक्स से भी फैलता है। गर्भावस्था के दौरान यदि कोई महिला जीका वायरस से प्रभावित है तो इससे बच्चे को गंभीर बीमारी हो सकती है। जीका वायरस का अभी तक कोई दवाई या टिका नहीं बना है। यह जानलेवा है।