हाईकोर्ट ने पाया कि विक्रांत बक्शी और चंद्र शर्मा के खिलाफ कठोर सबूत मिले हैं। विक्रांत के मोबाइल में युग की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग मिली, जिसमें वह आखिरी बार जीवित देखा गया था। यह रिकॉर्डिंग उस घर की थी, जिसे चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी ने किराये पर लिया था। अपहरण के दो साल बाद युग का कंकाल शिमला के भराड़ी स्थित क्लस्टन के पानी के टैंक से बरामद हुआ, जिसे चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी ने ही पुलिस को दिखाया था। तस्वीरें और वीडियो में जीवित देखे जाने के बाद युग का क्या हुआ, इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है। इसके आधार पर इन दोनों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।
संदेह का लाभ देते हुए तेजिंद्र को किया बरी
हाईकोर्ट ने पाया कि तेजिंद्र पॉल के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। अदालत ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत दिया गया तेजिंद्र का बयान, जिसमें कथित तौर पर बच्चे को अपने गोदाम में रखने और गत्ते के डिब्बे में ले जाने में मदद करने की बात स्वीकार की थी, किसी भी बरामदगी का कारण नहीं बना। इस कारण उसके बयान का इस्तेमाल उसे दोषी ठहरने के लिए नहीं किया जा सकता। हालांकि, यह साबित हुआ है कि तेजिंद्र ने अन्य आरोपियों से फोन पर बात की थी लेकिन केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि फोन पर क्या बातचीत हुई थी, तब तक केवल फोन कॉल से अपराध में उसकी संलिप्तता का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।