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युवाओं ने बांस की लकड़ी, मिट्टी और सीमेंट से बनाया देसी जिम

Sun, 30 May 2021 12:32 PM IST
अरविन्द ठाकुर उमेश कुमार शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर

सार

सीमेंट और मिट्टी से बने डंबल, भार उठाने वाले बड़े डंबल, अभ्यास के लिए बेंच प्रेस, अखाड़ा, पुल अप के लिए स्थान, अभ्यास के अन्य उपकरण बनाए हैं। युवकों का कहना है कि आपदा में इन्होंने यह उपकरण बनाए हैं, ताकि उनकी कसरत पर प्रभाव न पड़े।
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चमनेड़ गांव में युवाओं ने सीमेंट, बांस व मिट्टी से बनाए जिम उपकरण। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विकास खंड बमसन की चमनेड पंचायत के युवाओं ने कोरोना महामारी जैसी आपदा को अवसर में बदला है। कोरोना कर्फ्यू के चलते जिम बंद हैं। इसके चलते गांव के तीन युवाओं ने कसरत करने के लिए देसी तकनीक से जिम तैयार किया है। बॉडी बिल्डिंग के शौकीन युवाओं ने जिम बंद होने के बाद कसरत नहीं छोड़ी और बांस, सीमेंट, मिट्टी आदि से जिम के उपकरण देसी तरीके से तैयार किए हैं।

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इन्होंने एक अखाड़ा भी कुश्ती की प्रैक्टिस के लिए बनाया है। गांव के युवक यहां प्रैक्टिस करते हैं। हालांकि, कोरोना महामारी के चलते ज्यादा युवाओं को नहीं आने दिया जाता है, लेकिन इस मोहल्ले के युवा यहां कसरत करते हैं। गांव के लोगों ने भी इस जोश को सराहा है। युवाओं प्रवीण कुमार, राजीव कुमार और दीपक ने मेहनत कर इस देसी जिम को बनाया है। इससे पहले यह युवा जिम जाते थे, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के कारण जिम बंद होने पर इन्होंने घर पर ही देसी जिम बनाया है। यहां सीमेंट और मिट्टी से बने डंबल, भार उठाने वाले बड़े डंबल, अभ्यास के लिए बेंच प्रेस, अखाड़ा, पुल अप के लिए स्थान, अभ्यास के अन्य उपकरण बनाए हैं।

इन युवकों का कहना है कि आपदा में इन्होंने यह उपकरण बनाए हैं, ताकि उनकी कसरत पर प्रभाव न पड़े। साथ ही जिम में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। देसी तकनीक से इन उपकरणों से भी वैसा ही अभ्यास होता है। आपदा में उन्होंने यह जिम तैयार किया है। इसके बाद अब फिलहाल वह यहां कसरत कर रहे हैं। बॉडी बिल्डिंग के साथ साथ इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी यह कसरत कारगर है।

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