विशेषज्ञों की मानें तो नशे में डूबे व्यक्ति को अपनेपन से ही सुधारा जा सकता है। परिजन इसमें विशेष भूमिका निभा सकते हैं। परिजनों को इनको कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत करना चाहिए। दोस्तों के साथ इन्हें बाहर न भेजें। उनके साथ बैठकर कार्य की प्लानिंग करें। किसी भी कार्य में व्यस्त रखें और मनोबल हमेशा बनाए रखें। इन्हें आम आदमी की तरह नहीं बल्कि मरीज की तरह ट्रीट किया जाए।
चिट्टे की लत में डूबे बल्ह घाटी के एक युवक ने बताया कि इससे बाहर निकलना बिल्कुल आसान नहीं था। वह न चाहते हुए भी दलदल में फंसता चला गया और इससे बाहर जब निकलना चाहा तो वह उसे नामुमकिन दिखा। इसने अपनी आपबीती अपनी हालत का जिक्र अपने माता-पिता के साथ किया। नशा निवारण केंद्र में नौ महीने रहकर नशे से दूर हुआ। इस दौर में परिजन उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। सभी के सहयोग से ही उन्हें प्रेरणा मिली। हालांकि आज भी समाज में कुछ लोग उन्हें हीन भावन से देखते हैं। जबकि वह नशे की गर्त से बाहर आ चुके हैं।