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Shimla News: चिट्टे से एचआईवी और हृदय रोग की चपेट में आ रहे युवा

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नशा किस्त-10
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हेपेटाइटस-सी का भी रहता है खतरा, एक-दूसरे की सीरिंज के इस्तेमाल से फैल रहा है संक्रमण
परिजन भी बीमारियों का उपचार करवाने के लिए संवेदनशील नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टे की ओवरडोज से युवाओं की अकस्मात मौत का खतरा रहता है। यह नशा हेपेटाइटस-सी, एचआईवी, ब्रेन स्ट्रोक, टीबी समेत हृदय की गंभीर बीमारियों का कारण बन रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक चिट्टे का सेवन करने वाले युवाओं की सेहत को लेकर परिजन संवेदनशील नहीं हैं। इस वजह से नशे के आदी युवा लगातार बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि चिट्टे का इंजेक्शन से सेवन करने वालों को सीरिंज आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती है। ऐसे में नशे के आदी युवा एक दूसरे की इस्तेमाल की गई सीरिंज का प्रयोग करते हैं। चिंता की बात यह है कि इससे संक्रमित युवा अन्य युवाओं में भी संक्रमण फैला रहा है। इससे युवा एचआईवी से भी ग्रसित हो जाते हैं।
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डॉक्टरों के मुताबिक इस नशे की तलब इतनी तेज होती है कि इसके लिए युवा किसी भी हद तक जा सकते हैं। हर समय नशे में रहने के कारण ऐसे युवा अपनी सेहत को लेकर पूरी तरह से लापरवाह होते हैं। चिट्टे के सेवन से हेपेटाइटस-सी होने का सबसे अधिक खतरा रहता है। कई बार देखा गया है कि उपचार नहीं मिलने से युवा लिवर की गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। परिवार में ऐसे युवाओं की स्वीकार्यता नहीं होती है, ऐसे में परिजन भी उनकी सेहत को लेकर पूरी तरह से लापरवाह रहते हैं। इसके अलावा युवा फायबरोसिस जैसी बीमारी का शिकार भी हो जाते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक हेपेटाइटस-सी के अलावा नशे के आदी युवा हेपेटाइटस-बी से भी पीड़ित पाए गए हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक चिट्टे का नशा गैर कानूनी होने के कारण इसका सेवन करने के लिए युवा गुप्त स्थानों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में युवा बंद कमरों, गलियों और गाड़ियों में घंटों बैठे रहते हैं। इन स्थानों वायु संचालन की उचित व्यवस्था नहीं होती है। इस वजह से युवा श्वास की विभिन्न बीमारियों से भी ग्रसित हो रहे हैं।


हृदय रोग का भी रहता है खतरा
चिकित्सकों के मुताबिक इंजेक्शन से चिट्टे का सेवन करने पर युवा हृदय की गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहे हैं। इंजेक्शन से चिट्टा लेने पर यह नशा रक्त के जरिये हृदय से होकर दिमाग और शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचता है। ऐसे में नशे का सेवन करने वालों को इनफेक्टिव एंडोकार्डिटिस होने का खतरा रहता है। यह हृदय वाॅल्व या एंडोकार्डियम में होने वाला संक्रमण है। इससे पीड़ित मरीज को रात के समय तेज बुखार आना, पसीना आने जैसे लक्षण होते हैं। नसों में बार-बार इंजेक्शन से नशा लेने के कारण नसें बंद होना, मवाद पड़ जाना और गिल्टियां भी हो जाती हैं। चिट्टे से युवा लकवे का भी शिकार हो रहे हैं।
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कोट
चिट्टे का सेवन करने से युवा कई तरह की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इसको देखते हुए परिजनों को अपने बच्चों की सेहत को लेकर संवेदनशील होने की जरूरत है। साथ ही नियमित रूप से ऐसे युवाओं की चिकित्सा जांच करवानी चाहिए। नशा छोड़ने के लिए नियमित परामर्श की जरूरत रहती है।
-डाॅ. निधि शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोरोग विशेषज्ञ, आईजीएमसी
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