प्रदेश के युवा वैज्ञानिक ने बड़ा कमाल किया है। उन्होंने पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले कचरे से खाद ईजाद कर ली है। इससे पोल्ट्री फार्म के मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी। हर दिन पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करके एरोबिक कंपोजटिंग से कमाई की जा सकती है।
युवा वैज्ञानिक डा. अनिल शर्मा ने पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले कचरे को खाद बनाने में उपयोग कर कमाई का नया रास्ता तैयार किया है। इससे आसपास के पर्यावरण को भी बचाया जा सकेगा। साथ ही किसानों की जरूरत की अच्छी खाद भी तैयार की जाएगी। रामपुर के वैज्ञानिक डा. अनिल शर्मा ने पालमपुर से बीवीएससी और अमृतसर से एमवीएससी की है।
डा. अनिल शर्मा ने बताया कि अभी तक सबसे बड़ी समस्या यही थी कि पोल्ट्री फार्म में मरे हुए पक्षियों का जो कचरा जमा होता था, उसे दबाकर ही ठिकाने लगाया जाता था। पर्यावरण संबंधित समस्या भी रहती थी। पोल्ट्री फार्म के कचरे, धान के भूसे का अनुुपात में उपयोग कर एरोबिक कंपोजटिंग से मुनाफा कमाया जा सकता है। यह खाद तैयार करके किसान इसके इस्तेमाल से अच्छी पैदावार भी ले सकते हैं।
इससे कचरा ठिकाने लगेगा और अतिरिक्त कमाई भी होगी। डा. शर्मा ने बताया कि उन्होंने गुजरात में इस विषय पर पेपर पढ़ा और प्रथम स्थान मिला। कार्बन और नाइट्रोजन अनुपात 20: 1 रखा जाता है। इस अनुपात से पोल्ट्री फार्म के कचरे से बढ़िया खाद तैयार की जा सकती है।