हिमाचल प्रदेश में पहली बार किसी ग्लेशियर झील पर अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित होने जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस पायलट प्रोजेक्ट को लाहौल घाटी की घेपन झील में शुरू करने जा रहा है। प्रोजेक्ट पर सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग और लाहौल-स्पीति प्रशासन संयुक्त रूप से काम करेंगे। यह अत्याधुनिक सिस्टम झील में हिमखंड टूटने या ज्यादा पानी भरने की स्थिति में खतरे का संकेत पहले ही उपलब्ध करवाएगा। इससे ग्लेशियर और झील फटने, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारी समय रहते हो सकेगी। इसरो ने पहले ही कई ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील सूची में डाला है। घेपन झील भी इस सूची में शामिल है।