शिमला के कोटशेरा कॉलेज में भगवद गीता की शिक्षाओं और मानसिक स्वास्थ्य पर व्याख्यान आयोजित हुआ। विशेषज्ञों ने गीता के सिद्धांतों को आधुनिक तनाव और भ्रम दूर करने में प्रासंगिक बताया। कॉलेज में योग व ध्यान सत्र नियमित होंगे।
बोले, भगवद गीता की शिक्षाओं से दूर होता है भ्रम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा के अंग्रेजी विभाग ने शरीर और मन का संतुलन : आयुर्वेदिक माइंडफुलनेस तथा समग्र उपचार विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
अंग्रेजी ऑनर्स, डीएससी अंग्रेजी और अन्य विद्यार्थियों के लिए हुए इस व्याख्यान में 70 विद्यार्थियों ने भाग लिया। आयुष विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. अमित गुलेरिया ने कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। योग और ध्यान के माध्यम से भौतिक तथा आध्यात्मिक जीवन के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने मोबाइल फोन की बढ़ती लत, तनाव के स्तर में वृद्धि और आत्महत्या की दर जैसे चिंताजनक तथ्यों को साझा करते हुए मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली विधियों को अपनाने की जरूरत बताई। डाॅ. गुलेरिया ने भगवद गीता की कालजयी शिक्षाओं को भी रेखांकित किया जो आज भी तनाव, भ्रम और नैतिक द्वंद्वों से निपटने में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। गीता के सिद्धांतों का पालन कर व्यक्ति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाते हुए अनावश्यक चिंताओं से मुक्त रह सकता है।
अंग्रेजी विभाग ने यह संकल्प लिया कि विद्यार्थियों की नियमित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए योग और ध्यान सत्रों का आयोजन किया जाएगा। विभाग से आए विशेषज्ञों ने इंटरएक्टिव कार्यशालाएं और वेलनेस गतिविधियां आयोजित करने की योजना भी बनाई गई है। डॉ. पूनम किमटा चौहान, डॉ. प्रियंका विंटा, डॉ. मृणालिनी कश्यप, डॉ. दिव्या शर्मा, प्रो. मिताली धरेउला और प्रो. सुष्मिता नेगी उपस्थित रहीं।