-पेयजल व्यवस्था कंपनी के हवाले की गई। पानी की दरें और कूड़ा शुल्क भी बढ़ाया गया।
-आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को जमीन देने पर निगम गरमाया रहा। जनता को ऑनलाइन सेवाएं नहीं मिलीं।
-टाउनहाल लेने के निगम ने काफी प्रयास किए। लेकिन साल के अंत तक निराशा ही मिली। टूटीकंडी पार्किंग मिली।
-एक कॉल पर मिलीं अनेकों सेवाएं। वार्डों में वाटर एटीएम लगे। नए एंबुलेंस रोड, पार्क और पार्किंग बनाए गए।
-लीकेज रोकने के लिए कोटी बरांडी, गुम्मा परियोजनाओं के पाइप बदले। साफ पानी के लिए यूवी ट्रीटमेंट प्लांट लगे।
-सतलुज वाटर प्रोजेक्ट को विश्वबैंक से मंजूरी मिली। साल के अंत में दुकानों का किराया बढ़ाया गया।
-सितंबर में सांगटी पार्षद मीरा ने दिया इस्तीफा। स्मार्ट सिटी का काम लटका। अम्रुत के तहत कई पार्किंगों की योजनाएं तैयार हुईं।
-स्वच्छता रैकिंग में शिमला को मिला 144 रैंक। पहली बार शहर में गीला-सूखा कचरा अलग उठाने की योजना लागू की गई।