60 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके हैं संजय सूद
शिमला में बीते 40 वर्षों से संजय सूद निरंतर रंगमंच में कार्यशील हैं। साथ साथ विभिन्न विश्वविद्यालय और अन्य क्षेत्रों में जाकर नए कलाकारों को रंगमंच के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए कार्यशालाओं के माध्यम से प्रशिक्षित भी कर रहे हैं। संजय सूद 60 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके हैं। जिसके लिए भाषा संस्कृति अकादमी द्वारा वर्ष 2017 में इन्हें मनोहर सिंह स्मृति राज्य पुरस्कार से भी अलंकृत किया गया है।
प्रवीण चंदला और भूपेंद्र शर्मा रंगमंच के लौह स्तंभ
प्रवीण चंदला और भूपेंद्र शर्मा रंगमंच के लौह स्तंभ माने जाते हैं। प्रवीण चंदला लगभग 1975 से शिमला में रंगमंच में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। वह प्रोफेसर कमल मनोहर शर्मा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के युवा महोत्सवों में सक्रिय रहने के साथ-साथ नगर की रंगमंच की गतिविधियों में भी कार्य कर रहे हैं। जवाहर कौल ,परमेश शर्मा , सुरेंद्र गिल, देवेंद्र शर्मा सहित अनेक रंगकर्मी चाहे उम्र दराज हों लेकिन फिर भी अपने अभिनय के दमखम से दर्शकों को झकझोर रहे हैं।
रंगमंच में इनका भी है अहम योगदान
जिला मंडी में रंगमंच पर सबसे बड़ा योगदान सीमा शर्मा का रहा है जो लगभग 38 वर्षों से इस विधा से जुड़ी हैं और मंडी के सतोहन में रंगमंच का प्रशिक्षण केंद्र खोले हुए हैं। दक्षा शर्मा मंडी के अलावा अन्य क्षेत्रों में अपनी रंगमंचीय पैठ स्थापित कर कार्य कर रही हैं। राम पल मालिक, इंदु राज इंदु, दीप कुमार, वेद कुमार और मनजीत मनना भी मंडी क्षेत्र में रंगमंच को गति प्रदान कर कर रहे हैं। बिलासपुर में प्रोफेसर विनोद शर्मा, अभिषेक डोगरा और शिवांगी रघु रंगमंच की धार को तीखी करने में लगे हैं। सोलन में रंगमंच में संजीव अरोड़ा और हेमंत अत्री दो ऐसे नाम हैं जिन्होंने रंगमंच को अपना ध्येय बनाकर कार्य किया है। सिरमौर के मुख्यालय नाहन में रजत कुमार स्थापित कलाकार हैं जाे नाहन में रंगमंच गतिविधियों की धुरी है। हमीरपुर में दयाल प्रसाद रंगमंच की बड़ी हस्ती है। इन्होंने काफी समय तक शिमला में रंगमंच किया, अब अपनी गांव की भूमि में रंगमंच को स्थापित कर रहे हैं। जिला मुख्यालय धर्मशाला में सुनील समियाल, डॉ हर्षा राणा, अक्षय राजपूत और निकिता डडवाल, दीपांशी रंगमंच गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान है।