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हिमाचल: अब लोहे के कचरे से भी बनेगा कीमती मेटल पाउडर, वैज्ञानिकों ने किया शोध

Thu, 27 Mar 2025 12:19 PM IST
Krishan Singh कमलेश रतन भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर

सार

एनआईटी हमीरपुर और चेक रिपब्लिक बल्क सॉलिड सेंटर टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ ओसस्ट्राबा के वैज्ञानिकों ने तीन साल के शोध के बाद आविष्कार किया है।
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एनआईटी हमीरपुर की लैब में शोध कार्य करते वैज्ञानिक। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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निर्माण जगत में माइल्ड स्टील यानी लोहे की ग्राइंडिंग से निकलने वाले कचरे से भी अब कीमती मेटल पाउडर बनेगा। इससे मेटल पाउडर की कीमत कम होगी और इससे बनने वाले उपकरणों का निर्माण भी कम दाम पर हो पाएगा। इस लेकर एनआईटी हमीरपुर और चेक रिपब्लिक बल्क सॉलिड सेंटर टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ ओसस्ट्राबा के वैज्ञानिकों ने तीन साल के शोध के बाद आविष्कार किया है। अभी तक छोटे निर्माण क्षेत्र से लेकर बड़े उद्योगों में ग्राइंडिंग का कचरा एकत्र करने के लिए न तो कोई योजना है और न ही तकनीक। ऐसे में यह सूक्ष्म कचरा जल, वायु और मिट्टी के जरिये मनुष्यों और जानवरों के लिए घातक साबित हो रहा है। इससे कैंसर जैसी भयानक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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वैज्ञानिकों ने शोध कर स्कैनिंग इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोपी तकनीक से माइल्ड स्टील वेस्ट के माइक्रो साइज का पता लगाया। एक्सरे डाइफ्रैक्शन माइक्रो चिप्स के तत्वों का भी पता लगाया गया। इन माइक्रो चिप्स के घनत्व और तरलता का आकलन चैक रिपब्लिक बल्क सॉलिड सेंटर टेक्नीकल यूनिवर्सिटी ऑफ ओसस्ट्राबा में रिहोमीटर तकनीक से किया गया है। रिहोमीटर तकनीक में सामग्री की तरलता की क्षमता को जांचा जाता है। इन सभी प्रयोगों से वैज्ञानिकों ने पाया कि माइल्ड स्टील की ग्राइडिंग से निकलने वाला बारीक चूरा मेटल पाउडर के गुणों से भरपूर है। एनआईटी हमीरपुर के भौतिकी विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो. रवि कुमार एवं डॉ. अमरजीत सिंह, चेक गणराज्य के वैज्ञानिक डॉ. लूसी जेर्स्का और डॉ. डैनियल की शोध में मदद की।

गाड़ियों से लेकर जहाज के कलपुर्जों का सस्ता निर्माण
मेटल पाउडर का प्रयोग एडिटिव मेन्युफैक्चरिंग और पाउडर मेटलर्जी में किया जा सकता है। इससे एडिटिव मैन्यूफैक्चरिंग (थ्रीडी प्रिंटिंग) से बनने वाले कलपुर्जों की लागत कम होगी। इससे मेडिकल सहित कई अन्य उपकरण कम दामों पर तैयार हो सकेंगे। इसके अलावा पाउडर मेटलर्जी तकनीक से हाइटेक उद्योग के कलपुर्जे बनाने में प्रयोग किया जा सकता है। इसमें गाड़ियों से लेकर जहाज तक के उपकरण शामिल हैं। इस तकनीक से तरल पाउडर को ठोस आकार देने के बाद सिटरिंग तकनीक (निर्धारित तापमान में भट्ठी पर पकाना) से कम लागत में हाइटेक उद्योग के उपकरण तैयार होंगे।
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हाइटेक ग्राइंडिंग मशीन के लिए पेटेंट फाइल
इस कचरे को एकत्र करना चुनौती से कम नहीं है। जिन ग्राइंडिंग मशीनों का निर्माण क्षेत्र खुले में प्रयोग हो रहा है, वे चूरा को हवा अथवा मिट्टी में फैला रही हैं। ऐसे में इस तरह की मशीन भी विशेषज्ञ तैयार कर रहे हैं, जिससे यह कचरा बाह्य वातावरण में न जाए और ग्राइंडर चलाने वाले की सेहत भी प्रभावित न हो। इसके लिए भारतीय पेटेंट कार्यालय में विशेषज्ञों ने पेटेंट फाइल किया है। ऐसे में यह कचरा स्क्रैप की दरों पर बिकेगा।
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