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विश्व धरोहर दिवस: 500 जाजुराना का संरक्षक है विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क

Sun, 18 Apr 2021 12:48 PM IST
अरविन्द ठाकुर रोशन ठाकुर, अमर उजाला नेटवर्क, कुल्लू

सार

जून 2014 में विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क सूबे का पहला पार्क है। हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी का ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क सूबे का सबसे बड़ा नेशनल पार्कों में शुमार है। इसकी जैव विविधता को देखते हुए यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। इससे पर्यटन गतिविधियों के साथ वन्य प्राणियों, पक्षियों तथा जड़ी-बूटियों को संरक्षण मिला है। पार्क क्षेत्र में 25 और इको जोन में 50 प्रतिशत तक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है।
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ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जून 2014 में विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क सूबे का पहला पार्क है। हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी का ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क सूबे का सबसे बड़ा नेशनल पार्कों में शुमार है। इसकी जैव विविधता को देखते हुए यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। इससे पर्यटन गतिविधियों के साथ वन्य प्राणियों, पक्षियों तथा जड़ी-बूटियों को संरक्षण मिला है। पार्क क्षेत्र में 25 और इको जोन में 50 प्रतिशत तक पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है।

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1171 वर्ग किलोमीटर में फैला पार्क में राज्य पक्षी जाजुराना का संरक्षक बना है। यहां करीब 500 जाजुराना पक्षी हैं। कस्तूरी मृग और बर्फानी तेंदुआ भी पार्क क्षेत्र में पाया जाता है। नेशनल पार्क के निदेशक अजीत ठाकुर बताया कि पार्क में वन्य प्राणियों 31 प्रजातियों में काला और भूरा भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, घोरल, हिमालयन नीली भेड़, हिमालयन थार, हिमालयन विजल के अलावा मुर्गा प्रजाति और दुर्लभ पक्षियों की 209 नस्लों में जाजुराना, मोनाल, कोकलास, शाहिल, चिड सीजेंड और 44 तितलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। पार्क में वन्य प्राणियों के साथ पक्षियों व जड़ी-बूटियों के संरक्षण के साथ इनकी संख्या में वृद्धि हुई है।

1500 से 6000 मीटर तक ऊंची पहाड़ियों पर फैले इस पार्क के शिखरों एवं छोटे ग्लेशियरों से ब्यास की सहायक सैंज, तीर्थन और जीवा आदि नदियों को उद्गम है। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में न्यूली-शांघड़, न्यूली-सैंज, सैंज वैली,तीर्थन वैली, गुशैणी-तिंदर गांव, गुशैणी-शिल्ट हट, न्यूली-मनु मंदिर, सियूंड-पाशी गांव, रक्तीसर, जीवानाला-पार्वती वैली और पिन-पार्वती तथा मरौड़ से डेलाथाच-रोला आदि महत्वपूर्ण ट्रैकिंग रूट हैं। 
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पार्क एरिया में 832 के विभिन्न प्रजातियों के पौधे पाए जाते हैं। इनमें 69 प्रजातियों के पेड़, 113 प्रकार की झाड़ियां, 28 तरह की लताएं तथा 493 जड़ी-बूटियां शामिल हैं। खास बात है कि प्रदेश में पाई जाने 47 हर्बल जड़ी-बूटियों में से 34 पार्क में पाई जाती हैं।  

पार्क क्षेत्र में शिकार करने पर प्रतिबंध है। इस पर नजर रखने के लिए कई जगहों पर 35 से अधिक ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जिन पर वन्य प्राणियों की हलचल कैद करने और शिकारियों पर नजर रखी जाती है। 

पार्क के निदेशक अजीत ठाकुर ने कहा कि पार्क क्षेत्र के इको जोन में सैंज तथा तीर्थन क्षेत्र की 15 पंचायतें आती हैं। इन लोगों को रोजगार के साथ पुलों व रास्तों के निर्माण में पार्क प्रबंधन की ओर से मदद की जाती है। जोन क्षेत्र में अन्य विकास कार्यों में भी किसी तरह की रोकटोक नहीं है। निमयानुसार बड़े प्रोजेक्टों को भी आगे बढ़ाया जाता है।

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