हमीरपुर जिले के पनसाई निवासी सतपाल बताते हैं कि वह प्रत्येक तीन माह के बाद रक्तदान अवश्य करते हैं। इस उम्र में भी उनका यह जोश कम नहीं हुआ है। यही वजह है कि कोरोना काल में भी जब किसी व्यक्ति को खून की जरूरत पड़ी तो उन्होंने तुरंत रक्तदान किया।
जरूरी नहीं देश के सेवा के लिए सेना की वर्दी ही पहनी जाए, अगर कोई सेना में नहीं है और दिल में जज्बा हो तो कहीं भी किसी भी तरीके से देश सेवा कर सकता है। रक्तदान कर लोगों की जान बचाना भी देश सेवा है। यह कहना है हमीरपुर के रहने वाले सतपाल शर्मा का। नगर परिषद हमीरपुर के वार्ड नंबर दो के निवासी 60 वर्षीय सतपाल शर्मा अब तक करीब 93 बार रक्तदान कर चुके हैं। सतपाल शर्मा एक कुशल कारोबारी के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं। वह समाज सेवा के लिए हर समय आगे रहते हैं।
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मूल रूप से हमीरपुर जिले के पनसाई निवासी सतपाल बताते हैं कि वह प्रत्येक तीन माह के बाद रक्तदान अवश्य करते हैं। इस उम्र में भी उनका यह जोश कम नहीं हुआ है। यही वजह है कि कोरोना काल में भी जब किसी व्यक्ति को खून की जरूरत पड़ी तो उन्होंने तुरंत रक्तदान किया। सतपाल बताते हैं कि पहली बार उन्होंने वर्ष 1975 में डिग्री कॉलेज में प्रथम वर्ष की पढ़ाई के दौरान रक्तदान किया था।
कॉलेज में ब्लड डोनेशन कैंप में रक्तदान किया था। उसके बाद किसी व्यक्ति को जरूरत पड़ने पर रक्तदान करते रहे हैं। रक्तदान के बाद किसी तरह के नुकसान से इनकार करते हुए सतपाल ने कहा कि मेरी बेटी डॉक्टर है। डॉक्टर बेटी निकिता भी यही कहती हैं कि रक्तदान से स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता है।