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Shimla: हरित एकीकृत योजना में खर्च होंगे 2500 करोड़, विश्व बैंक ने दिखाई दिलचस्पी

Mon, 06 Feb 2023 09:31 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

विश्व बैंक की सहायता से वर्ष 2025 तक प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के उठाए जाने वाले विभिन्न कदमों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान विश्व बैंक ने 2500 करोड़ के ग्रीन रेजीलिएंट इंटेग्रेटिड प्रोग्राम (हरित लचीला एकीकृत कार्यक्रम) में रुचि दिखाई।
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सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिले विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को शिमला में विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक (सतत विकास) जॉन रूमे के नेतृत्व में विश्व बैंक की टीम के साथ बैठक के दौरान प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य बनाने की अवधारणा पर चर्चा की। इस दौरान विश्व बैंक की सहायता से वर्ष 2025 तक प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के उठाए जाने वाले विभिन्न कदमों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान विश्व बैंक ने 2500 करोड़ के ग्रीन रेजीलिएंट इंटेग्रेटिड प्रोग्राम (हरित लचीला एकीकृत कार्यक्रम) में रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक की टीम के इस दौरे के सफल परिणाम सामने आएंगे, जिससे प्रदेश सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2025 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने के लक्ष्य को पाने में सहायता मिलेगी। प्रदेश सरकार ने आगामी नौ महीनों में 200 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

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राज्य सरकार वर्ष 2024 के अंत तक 500 मेगावाट सौर ऊर्जा का दोहन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित कर रही है जिससे प्रदेश का वातावरण भी संरक्षित रहेगा। प्रथम चरण में आगामी वर्ष तक अधिकतम विभागों में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्व बैंक इस संबंध में विभिन्न कार्यक्रमों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करेगा। जाॅन रूमे ने मुख्यमंत्री की ओर से हरित ऊर्जा एवं स्वच्छ राज्य के लक्ष्य को प्राप्त करने की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास एक अच्छी शुरुआत प्रदान करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन नीति को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा तथा शीघ्र ही विश्व बैंक की एक टीम तकनीकी समीक्षा के लिए प्रदेश का दौरा करेगी। इस अवसर पर मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

विश्व बैंक ने हिमाचल में वित्त पोषित परियोजनाओं की समीक्षा की

वहीं, विश्व बैंक की टीम ने दक्षिण एशिया क्षेत्र के क्षेत्रीय निदेशक (सतत विकास) जॉन रूमे की अध्यक्षता में 5 व 6 फरवरी को राज्य का दौरा किया। इसी कड़ी में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में हिमाचल प्रदेश में रेजीलिएंट पर्वतीय समुदायों में नए कार्यक्रमों की संभावनाओं पर सोमवार को शिमला में एक बैठक आयोजित की गई। विश्व बैंक की टीम को अवगत करवाया गया कि प्रदेश सरकार हरित विकास से जलवायु अनुकूल हरित हिमाचल की ओर बढ़ने की ओर अग्रसर है। पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग का उद्देश्य सतत समावेशी हरित रेजीलिएंट हिमाचल की दिशा में हरित विकास पहलों को प्रोत्साहित करना है। इस बैठक के दौरान राज्य में जिन नई परियोजनाओं में प्रदेश को विश्व बैंक से सहायता की आवश्यकता है, उन पर भी चर्चा की गई। इन योजनाओं में राज्य में कार्बन तटस्थता प्राप्त करने के लिए ग्रीन-ईवी-मोबिलिटी प्रोग्राम के लिए समर्थन शामिल है। ग्रीन इंडिया मिशन एप्रोच के तहत हिमाचल के लिए हाइड्रो सस्टेनेबिलिटी, सस्टेनेबल फॉरेस्ट्री और नेचुरल कैपिटल मैनेजमेंट के लिए सस्टेनेबल कैचमेंट और पर्यावरण प्रबंधन के लिए कार्यप्रणाली विकसित करने के लिए सभी 12 जिला और क्षेत्रीय परियोजनाओं में शहरों में आवागमन सुचारू बनाना शामिल है।

इस बैठक के दौरान नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (शहरी और ग्रामीण) के सुरक्षित एवं सुचारू प्रबंध के माध्यम से राष्ट्रीय स्रोत प्रबंधन के समर्थन के लिए भी चर्चा की गई। औद्योगिक अपशिष्ट के सुरक्षित निष्पादन के लिए कुशल जल प्रबंधन सहित अपशिष्ट जल पुनर्भरण के निपटान के अलावा शासन एवं सेवा वितरण में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर भी गहन चर्चा की गई। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने कहा कि एक इकाई के रूप में नदी बेसिन दृष्टिकोण के साथ विकासात्मक योजनाओं और रणनीतियों के सामंजस्य के लिए और भू-उपयोग योजना, स्थानिक योजना पर काम करने, वन जलग्रहण, जल सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और कृषि विकास योजनाओं को लैंडस्केप दृष्टिकोण में विकसित करने और तथा एकीकृत परिदृश्य पारिस्थितिकी तंत्र को अपनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रीय नीतियों को बढ़ाया जाएगा। क्षेत्रीय निदेशक जॉन रूमे ने प्रदेश में कार्यान्वित की जा रही विश्व बैंक वित्त पोषित विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की। विश्व बैंक टीम के साथ समन्वय कर रहे निदेशक पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ललित जैन ने बैंक के साथ हिमाचल प्रदेश में हरित विकास के लिए विभिन्न पहलों के बारे में विस्तृत प्रस्तुति दी।

 
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सतलुज जल परियोजना के निर्माण कार्यों से पूरी संतुष्ट नहीं विश्वबैंक

 शहरवासियों को 24 घंटे पानी की सुविधा देने की सतलुज पेयजल योजना पर सोमवार को विश्वबैंक के साथ कंपनी के अधिकारियों की बैठक हुई। देर शाम पांच बजे शुरू हुई यह बैठक करीब तीन घंटे तक चली। सूत्रों के अनुसार बैंक की टीम इस योजना में हो रहे काम की रफ्तार से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। इस दौरान पेयजल योजना के विभिन्न कार्यों को लेकर रिपोर्ट ली गई।

कंपनी ने बताया कि मुख्य लाइन बिछाने का काम शुरू किया जा रहा है। पंपिंग स्टेशन, जल भंडारण टैंकों का काम भी जोरों से चल रहा है। अब मंगलवार को भी विश्वबैंक की टीम अधिकारियों के साथ बैठक करेगी। बैठक में कंपनी के प्रबंध निदेशक डॉ. पंकज ललित और महाप्रबंधक अनिल मेहता समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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