गुजरात विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र सूर्य प्रसाद त्रिवेदी ने कहा कि जब भी चुनाव होते हैं तो उनमें शिक्षकों की ही ड्यूटी लगाई जाती है। ऐसे में लगातार चलने वाली चुनावी प्रक्रिया की वजह से शैक्षणिक व्यवस्था को नुकसान होता है।
वहीं, जम्मू कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष निर्मल सिंह ने अपने राज्य का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया चलते रहने का नतीजा है कि उनकी साढ़े तीन साल की सरकार को दो साल ही विकास कार्य के लिए मिले। कहा कि अगर चुनाव एक बार हो तो सरकारों के पास कामकाज के लिए ज्यादा समय रहेगा।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष कंवरपाल गुर्जर ने लोकसभा और विधानसभा ही नहीं बल्कि पंचायती राज और स्थानीय निकाय के चुनाव भी एक साथ कराने की पैरवी की ताकि चुने हुए प्रतिनिधियों को काम करने का समय मिल सके और जनता भी उनसे हिसाब मांग सके।
पीडीपी विधायक जावेद हसन बेग ने कहा कि एक देश एक चुनाव बोलने जितना आसान नहीं है। कहा कि कश्मीर में जब सरकार गिरी तो उस जैसे हालात में एक देश एक चुनाव का निर्णय देशहित से समझौता करने जैसी समस्या खड़ी कर सकता है।
निर्णय लेने से पहले उसकी कमियाें पर जरूर विचार किया जाए ताकि बाद में दुख न हो। हरियाणा से विधायक घनश्याम दास, जाकिर हुसैन और गीता भुक्कल ने एक साथ चुनाव होने की स्थिति में लगने वाली आचार संहिता से देश का विकास रुक जाने की आशंका जताई।
कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल व विधायक राकेश पठानिया ने तपोवन में ई-विधान अकादमी बनाने की पैरवी की। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि वह इसको लेकर पूरा प्रयास करेंगी।
ई-विधान प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रणाली को संसद की कार्यवाही में भी अमल में लाया जा रहा है और अब अधिकतर कार्य कागजरहित प्रणाली के माध्यम से किए जा रहे हैं।
नहीं पहुंचे मध्य प्रदेश और राजस्थान के विस अध्यक्ष
क्षेत्र चार के अंतर्गत कार्यशाला में मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के विधानसभा अध्यक्ष शामिल नहीं हो सके। बिंदल ने बताया कि चुनावी प्रक्रिया के चलते राजस्थान व मध्य प्रदेश के विधायक भी नहीं आ सके लेकिन सभी जगह से विधानसभा के अधिकारी कार्यशाला में शामिल हुए।